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एक अच्छी बीमा पॉलिसी के साथ पर्याप्त आपात कोष भी रखें

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Last Updated- December 12, 2022 | 5:40 AM IST

जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी) के कोविड से संबंधित दावों के आंकड़े संकेत देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति के पास स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है तो इस बात के ज्यादा आसार हैं कि उसे अपनी बीमा कंपनी की तरफ से दावे का भुगतान किया जाएगा। हालांकि भुगतान की जाने वाली राशि उसके दावे से कम हो सकती है।
जीआईसी के आंकड़ों के मुताबिक महामारी की शुरुआत से 10 अप्रैल, 2021 तक सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को 10.14 लाख कोविड से संबंधित दावे मिले हैं। ये दावे कुल 14,800 करोड़ रुपये से अधिक राशि के हैं।
बीमा कंपनियों ने इनमें से 7,956 करोड़ रुपये के 8,65,968 दावों का निपटान कर दिया। दावों की संख्या के लिहाज से 85.4 फीसदी दावों का निपटान कर दिया गया, लेकिन धनराशि के हिसाब से केवल 53.8 फीसदी राशि का ही भुगतान किया गया है।
अपर्याप्त बीमित राशि
बीमा कंपनियों का कहना है कि धनराशि के लिहाज से निपटाए गए मामलों का प्रतिशत कम होने की कई वजह हैं। मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के निदेशक (अंडरराइटिंग, उत्पाद एवं दावे) भाबातोष मिश्रा ने कहा, ‘कई बार ग्राहक की बीमित राशि कम होती है। आम तौर पर कोविड के दावे का औसत आकार बड़ा होता है, लेकिन उसे बीमित राशि तक ही भुगतान किया जा सकता है।’
हर पॉलिसी में कुछ बंदिशें होती हैं, जिनसे भी भुगतान कम हो जाता है। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के प्रमुख (स्वास्थ्य कारोबार) अमित छाबड़ा ने कहा, ‘बहुत सी पुरानी पॉलिसी में कमरे के किराये की सीमाएं होती हैं।’ कुछ पॉलिसी में कुछ तय उपचारों, डॉक्टरों की फीस, आईसीयू चार्ज आदि पर सीमाएं होती हैं। कोविड के मामलों में पीपीई किट जैसी चीजें इस्तेमाल होती हैं, जिनका बिल में बड़ा हिस्सा होता है। आम तौर पर सामान्य उपचारों में इन चीजों का हिस्सा 8 से 10 फीसदी होता है। छाबड़ा ने कहा, ‘कुछ पॉलिसियों में इन चीजों का भुगतान होता है और कुछ में नहीं।’
बहुत सी राज्य सरकारों या उनकी राज्य चिकित्सा परिषदों ने शुल्क दरें तय की हुई हैं। सिक्योर नाऊ इंश्योरेंस ब्रोकर के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक कपिल मेहता ने कहा, ‘बीमा कंपनियों का कहना है कि वे इन शुल्क दरों का भुगतान करेंगी। अगर अस्पताल ऊंची दर का बिल बनाता है तो बीमा कंपनियां निर्धारित स्तर से अधिक राशि का भुगतान करने से इनकार कर देती हैं।’ कई बार बीमा कंपनियां अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पर भी सवाल उठाती हैं। उपचार प्रद्धति को लेकर भी विवाद पैदा हो जाते हैं। बीमा कंपनियां केवल मानक और प्रमाणित उपचार पद्धतियों के लिए ही भुगतान करना चाहती हैं।
पॉलिसी की विशेषताओं को जांचें
महामारी का कहर जारी है। ऐसे में मिश्रा सुझाव देते हैं कि आपको अपने लिए पर्याप्त बीमित राशि (20 लाख रुपये या उससे अधिक) सुनिश्चित करनी चाहिए। यह अपनी पॉलिसी की विशेषताओं पर फिर से विचार करने का अच्छा समय है। छाबड़ा ने कहा, ‘यह जांचें कि क्या आपकी पॉलिसी में सीमाओं, सह-भुगतान या कटौती की जरूरतें हैं।’ सह-भुगतान और कटौती दोनों का मतलब है कि मरीजों को बिले के एक हिस्से का बोझ खुद उठाना पड़ेगा। सह-भुगतान प्रतिशत में होता है और कटौती एक निश्चित राशि में होती है।
अपने आसपास के अच्छे अस्पतालों की एक सूची बनाएं, जो आपकी बीमा कंपनी के कैशलेस नेटवर्क में शामिल हैं। अगर आप जल्दबाजी में उस अस्पताल में चले जाते हैं, जो आपकी बीमा कंपनी के नेटवर्क में शामिल नहीं है तो आपको खुद बिल का भुगतान करना होगा और बाद में उसका रीइंबर्समेंट प्राप्त करना होगा। यह बोझिल काम हो सकता है। रीइंबर्समेंट में बीमा कंपनियां ज्यादा सवाल पूछती हैं और ज्यादा दस्तावेज मांगती हैं।
मेहता सुझाव देते हैं कि अगर आपको डर है कि बीमा कंपनी अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत को लेकर सवाल उठा सकती है तो अपने डॉक्टर से लिखित में यह बयान लें कि यह जरूरी था। अगर प्लाज्मा थैरपी जैसी नई उपचार पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है तो अपने डॉक्टर से इसी तरह का बयान लें।
नकदी कोष बनाएं
मरीजों को बिल के एक हिस्से का बोझ खुद उठाना पड़ सकता है, इसलिए आपात कोष बनाना बहुत जरूरी है। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और फिड्यूशरी के संस्थापक अविनाश लूथरिया ने कहा, ‘सबसे पहले आपकी पत्नी और आप में से प्रत्येक बचत खाते की जमाओं, एक नाम पर सावधि जमाओं (संयुक्त नहीं क्योंकि उन्हें तोडऩे के लिए दो हस्ताक्षरों की जरूरत पड़ती है) में कुल संपत्ति और क्रेडिट कार्ड की इस्तेमाल नहीं की गई सीमा के कम से कम एक फीसदी हिस्से को निकालने में सक्षम हो। दूसरा, आपमें से प्रत्येक एक सप्ताह के भीतर आपकी संयुक्त संपत्ति के पांच फीसदी हिस्से को निकालने में सक्षम होना चाहिए।’

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First Published - April 21, 2021 | 8:10 PM IST

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