facebookmetapixel
Advertisement
विजय शेखर शर्मा का दावा: स्मार्टफोन व युवा शक्ति के दम पर ‘AI और LLM कैपिटल’ बनेगा भारतLIC MF ने उतारा नया टेक्नोलॉजी फंड, ₹200 की SIP से एआई, डेटा सेंटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म में निवेश का मौकाMarket This Week: नतीजों से मिला सपोर्ट, अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता; बढ़त में रहे सेंसेक्स और निफ्टीPM Rahat Yojana: ₹1.5 लाख तक फ्री इलाज! रोड एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए आई नई योजना, जानें पूरी प्रक्रिया5 साल में SIP से 15-20 लाख की SUV खरीदें: कैश या डाउन पेमेंट, जानें सही प्लान8 लाख लोगों को मिलेगा फायदा! इस राज्य में राशन कार्ड को लेकर बदले नियम, आय सीमा में हुई बड़ी बढ़ोतरीOla Electric Share: कभी ₹157 पर था, आज 26 रु पर आया; क्यों भंग हुआ निवेशकों का भरोसा?इंडिया-यूएस ट्रेड डील मार्च में साइन होने की संभावना, अप्रैल से हो सकती है लागू: गोयलअमेरिका की अगुवाई वाले Pax Silica गठबंधन में शामिल हुआ भारत, AI और क्रिटिकल मिनिरल्स सप्लाई चेन को मजबूतीमोतीलाल ओसवाल की नई रिपोर्ट: चश्मा कंपनी पर शुरू की कवरेज, 25% अपसाइड का दिया टारगेट

Government Bonds: दीर्घावधि सरकारी बॉन्डों से पीछे छूटे कम अवधि के बॉन्ड

Advertisement

निवेशक लंबी अवधि के सरकारी बॉन्डों या जी-सैक के पक्ष में हैं।

Last Updated- February 19, 2024 | 11:40 PM IST
As centre pushes muni bonds, Surat, Vizag may tap markets soon

बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की कमी और दर में कटौती देर से होने की उम्मीद के कारण फरवरी में कम अवधि के सरकारी बॉन्ड, लंबी अवधि की प्रतिभूतियों से पीछे छूट गए हैं। बाजार के हिस्सेदारों ने यह जानकारी दी।

निवेशक लंबी अवधि के सरकारी बॉन्डों या जी-सैक के पक्ष में हैं। बीमा कंपनियां और पेंशन फंड 30 साल और इससे ज्यादा अवधि की परिपक्वता वाले सरकारी बॉन्ड इकट्ठा कर रहे हैं।

शुक्रवार को उधारी योजना खत्म होने तक लंबी अवधि की प्रतिभूतियों के लिए प्राथमिकता बनी रही। इसने संस्थागत निवेशकों को द्वितीयक बाजार में अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मजबूर किया।

बैंक अपनी देनदारी प्रोफाइल के मुताबिक कम अवधि के पक्ष में रहे, वहीं पेंशन फंड और बीमा कंपनियों जैसे निवेशकों ने दीर्घावधि बॉन्डों को तरजीह दी है, जिससे उनकी दीर्घावधि देनदारियां पूरी सकें। इसी तरह से मध्य अवधि खासकर 10 से 14 साल की सीमा वाले निवेश के साधनों पर प्राथमिक रूप से ट्रेडिंग में मांग रही।

शुक्रवार को फरवरी में (सोमवार को मुद्रा बाजार बंद थे) 40 साल का सरकारी बॉन्ड 12 आधार अंक गिरकर बंद हुआ। वहीं 5 साल और इससे कम अवधि में परिपक्व हो रहे बॉन्ड की मांग कम रही और 5 साल, 3 साल के सरकारी बॉन्ड इस अवधि के दौरान क्रमशः 1 आधार अंक और 3 आधार अंक बढ़े।

10 साल के सरकारी बेंचमार्क बॉन्ड का यील्ड भी फरवरी में 5 आधार अंक कम हुआ है।

बैंकिंग व्यवस्था में नकदी 5 दिसंबर 2023 से ही कम बनी हुई है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को नकदी की कमी 2.10 लाख करोड़ रुपये थी।

करूर वैश्य बैंक के कोषागार प्रमुख वीआरसी रेड्डी ने कहा, ‘नकदी की कमी और दर में कटौती की उम्मीद देरी से होने की संभावना के कारण स्थिति अल्पावदि बॉन्डों के अनुकूल नहीं है।’ उन्होंने कहा कि दीर्घावधि बॉन्ड के लिए स्थिति अनुकूल है क्योंकि केंद्र का बजट सकारात्मक रहा है और बाजार जानता है कि दर में कटौती में देरी होगी, लेकिन यह होना निश्चित है। ऐसे में बाजार दीर्घावधि के हिसाब से पोजिशन ले रहा है।

Advertisement
First Published - February 19, 2024 | 11:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement