ईरान और अमेरिका के बीच चरणबद्ध युद्धविराम समझौते की खबरें आने के बाद सोमवार को सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई। इस समझौते की शुरुआत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने से मानी जा रही है। इससे बाजार धारणा बेहतर हुई और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। डीलरों ने कहा कि व्यापारी बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले से पहले अपनी पोजीशन बना रहे थे।
बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 7.04 फीसदी पर बंद हुई जबकि पिछले दिन यह 7.13 फीसदी थी। एक निजी बैंक के डीलर ने कहा, ‘युद्धविराम की खबरों से यील्ड में गिरावट आई।’
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने अपने वृहद पूर्वानुमान में संशोधन किया है। बैंक ने अनुमान जाहिर किया है कि ईंधन कीमतों में तेजी और आपूर्ति में व्यवधान से वित्त वर्ष 2027 में भारत की वृद्धि बनाम मुद्रास्फीति पर असर पड़ने की संभावना है।
वित्त वर्ष 2027 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के पूर्वानुमान को 7 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हम एमपीसी से दरें स्थिर रखने की अपनी सलाह बरकरार रखते हैं क्योंकि मुद्रास्फीति में वृद्धि अपेक्षित मुद्रास्फीति दायरे (2 से 6 फीसदी) में रहने की संभावना है। अगर ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि होती है तो 25 से 50 आधार अंकों की रीपो दर वृद्धि का जोखिम दिख सकता है।’ बैंक ने वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की औसत कीमत 90 से 95 डॉलर प्रति बैरल मानी है।
केंद्रीय बैंक की दर-निर्धारण समिति ने सोमवार को अपनी तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक शुरू की। व्यापक तौर पर नीतिगत दर को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने और तटस्थ रुख जारी रखने की उम्मीद है।
इस बीच, बैंकों द्वारा आर्बिट्राज पोजीशनों को समाप्त करने के लिए डॉलर की बिक्री जारी रखने के कारण दिन के दौरान रुपया अपनी बढ़त बढ़ाने में सफल रहा। मगर भू-राजनीतिक तनाव के कारण आयातकों द्वारा हेजिंग के लिए कदम उठाने से सत्र के अंत तक इसमें से अधिकांश बढ़त कम हो गई।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति में सुधार ने रुपये को सहारा दिया। दिन के कारोबार के दौरान रुपया 92.79 प्रति डॉलर तक मजबूत होकर 93.06 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले दिन के 93.10 प्रति डॉलर के मुकाबले मामूली बढ़त है।
मार्च में डॉलर के मुकाबले 4 फीसदी से अधिक की गिरावट के बाद रुपये ने पिछले तीन कारोबारी सत्रों में 1.9 फीसदी की बढ़त के साथ अपनी वापसी की है। यह नियामकीय कदमों जैसे ऑनशोर डिलिवरेबल मार्केट में नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने और कंपनियों को नॉन-डिलिवरेबल डेरिवेटिव अनुबंध की पेशकश पर प्रतिबंध लगाने के कारण हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को मंगलवार तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को गुजरने की अनुमति देने की चेतावनी देने के बाद बाजार कारोबारियों ने सावधानी बरती।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों से उत्साहित, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और जोखिम लेने की भावना में सुधार के कारण रुपये में मजबूती आई। इससे माहौल अनुकूल बना।’ उन्होंने कहा, ‘क्षेत्रीय मुद्राओं के बीच मजबूती और सट्टा के कारण अस्थिरता को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा सक्रियता से किए गए उपायों ने रुपये को मजबूती प्रदान की। आगे बाजार सहभागियों की नजरें भू-राजनीतिक सुर्खियों और आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति के फैसले पर बनी रहेंगी।’
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें पिछले सत्र के 108 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 107 डॉलर प्रति बैरल हो गईं जबकि डॉलर इंडेक्स 100.13 से फिसलकर 99.85 पर आ गया जो 100 के स्तर से नीचे चला गया। डॉलर इंडेक्स छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है।