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डिजिटल लेनदेन पर अब मिलेगा ‘रिस्क स्कोर’, साइबर ठगी और ‘म्यूल अकाउंट’ पर नकेल कसने की तैयारी

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साइबर धोखाधड़ी और म्यूल खातों को रोकने के लिए आरबीआई इनोवेशन हब 'आईडीपीआईसी' के जरिये रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन को जोखिम स्कोर देने की प्रणाली शुरू कर रहा है

Last Updated- May 17, 2026 | 10:15 PM IST
Digital payments
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

डिजिटल लेनदेन को जल्द ही रियल-टाइम यानी उसी वक्त डिजिटल स्कोर दिए जाएंगे। यह कदम बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों के बीच ‘म्यूल अकाउंट’ के जरिये पैसों के लेनदेन के मूल स्रोत का पता लगाने के लिए उठाया जा रहा है। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी या जालसाज साइबर ठगी और धनशोधन जैसे अवैध तरीके से कमाए गए पैसों को छिपाने और एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए करते हैं।

डिजिटल लेनदेन को स्कोर देना भारतीय रिजर्व बैंक इनोवेशन हब द्वारा शुरू की गई परियोजना का दूसरा चरण है। इस परियोजना को इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन द्वारा लागू किया जाएगा। यह कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत गठित कंपनी है जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान तंत्र में होने वाली धोखाधड़ी का वास्तविक समय में पता लगाना, उसे रोकना और उसका विश्लेषण करना है।

इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (आईडीपीआईसी) के प्रबंध निदेशक और सीईओ के सत्यनारायण राजू ने कहा, ‘जब तक आप म्यूल अकाउंट का खुलना नहीं रोकते, तब तक साइबर धोखाधड़ी पर काबू पाना मुश्किल होगा। पैसों का हेरफेर इन्हीं खातों के जरिये किया जाता है।’

आरबीआई इनोवेशन हब ने संदिग्ध रजिस्ट्री बनाने के उद्देश्य से  म्यूलहंटरडॉटएआई टूल बनाया था। इसके तहत जब कोई बैंक किसी मनी म्यूल खाते की पहचान करता है तो उस जानकारी को एक रजिस्ट्री में सुरक्षित रखा जाएगा और बैंकों के बीच साझा किया जाएगा। अब तक 4 सार्वजनिक क्षेत्र के और 2 निजी क्षेत्र के यानी 6 बैंक इस रजिस्ट्री के साथ जुड़ चुके हैं।

डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए आईडीपीआईसी मुख्य एजेंसी के रूप में काम करेगा। राजू ने कहा, ‘हम संदिग्ध रजिस्ट्री को बनाए रखने और इसे बैंकों जैसी अन्य संस्थाओं के साथ जोड़ने के लिए नोडल संस्था होंगे।’ 

दूसरे चरण के लिए आरबीआई इनोवेशन हब ने एक डिजिटल मंच तैयार किया है जो तात्कालिक आधार पर डिजिटल लेनदेन का जोखिम स्कोर देगा। राजू ने बताया, ‘हमारे पास रजिस्ट्री है और इसके आधार पर यह पता चलेगा कि भुगतान कौन कर रहा है, लाभार्थी कौन है और दोनों का जोखिम स्तर कम, मध्यम या अधिक है।’

बैंक अपनी नीतियों के अनुसार कम, मध्यम और अधिक जोखिम के लिए एक सीमा तय कर सकते हैं। यदि खाता कम जोखिम वाला है तब लेनदेन तुरंत हो सकता है। मध्यम जोखिम वाले मामले में लेनदेन में थोड़ी देर हो सकती है। ज्यादा जोखिम वाले मामलों में बैंक अधिक सतर्कता अपनाएंगे। बैंक जरूरत पड़ने पर लाभार्थी या भुगतानकर्ता से लेनदेन के दस्तावेज और प्रमाण भी मांग सकता है।

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First Published - May 17, 2026 | 10:15 PM IST

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