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GST राहत के बाद भी ULIP का जलवा बरकरार! जानें क्यों नहीं घट रही निवेशकों की दिलचस्पी

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जीएसटी छूट और प्रोटेक्शन प्लान्स पर फोकस के बावजूद निजी जीवन बीमा कंपनियों में ULIP पॉलिसियों का दबदबा कायम है।

Last Updated- May 18, 2026 | 7:55 AM IST
ULIP
Representative image

वित्त वर्ष 2026 में भारत की प्रमुख निजी जीवन बीमा कंपनियों के उत्पाद मिश्रण में यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) का दबदबा बरकरार रहा। इससे पता चलता है कि जीवन बीमा पॉलिसियों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में छूट के बाद कंपनियों द्वारा प्रोटेक्शन व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद बाजार से जुड़ी पॉलिसियों पर निर्भरता बनी हुई है।

निवेशक प्रस्तुतियों और विश्लेषक वार्ताओं से पता चलता है कि साल के दौरान प्रमुख निजी जीवन बीमा कंपनियों के एनुअलाइज्ड प्रीमियम इक्वीवैलेंट (एपीई) में सबसे बड़ा योगदान यूलिप का रहा है। इससे इक्विटी-लिंक्ड बचत उत्पादों को लेकर ग्राहकों की निरंतर रुचि बने रहने के संकेत मिलते हैं। सुरक्षा देने वाली बीमा पॉलिसियां तेजी से बढ़ रही हैं, इसके बावजूद कुल बीमा कारोबार में इनकी हिस्सेदारी बहुत कम है।

इससे उद्योग के कुछ हितधारकों की चिंता बढ़ी है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में प्रबंध निदेशक (कॉर्पोरेट बैंकिंग और सहायक कंपनियां) अश्विनी तिवारी ने कहा कि बीमा कंपनियों को बाजार से जुडी पॉलिसियों के बजाय सुरक्षा उत्पादों पर अधिक जोर देना चाहिए।

तिवारी ने कहा, ‘मेरे विचार से एक बीमा कंपनी का पहला काम हमेशा सुरक्षा से जुड़ी पॉलिसी बेचना होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से कुल कारोबार में सुरक्षा से जुड़ी पॉलिसियों की हिस्सेदारी महज 10 प्रतिशत है।’ उन्होंने कहा कि एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस को वह अक्सर कहते हैं कि बीमा कंपनी के दृष्टिकोण से यूलिप बेचना अच्छा विचार नहीं है।

जीएसटी परिषद द्वारा सितंबर 2025 में व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर कर की दर 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने के बाद बीमा कंपनियां सुरक्षा उत्पादों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

बीमा कंपनियों ने कहा कि इस कदम से पॉलिसी खरीदने वालों के सामर्थ्य में सुधार हुआ है और वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सुरक्षा पॉलिसियों खासकर अधिक कवर वाली बीमा पॉलिसियों की मांग बढ़ी है।

वित्त वर्ष 2026 में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के कुल एपीई में 60 प्रतिशत यूलिप की हिस्सेदारी थी, जबकि एक साल पहले यह 64 प्रतिशत थी। वहीं सुरक्षा से जुड़ी पॉलिसियों की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत थी। कंपनी ने कहा कि वह धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो को गैर-यूलिप उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ अमित झिंगरन ने हाल में बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘पिछले 2 वर्षों से हम आक्रामक रूप से गैर यूलिप पॉलिसियों को आगे बढ़ाकर अधिक संतुलित उत्पाद मिश्रण रखने का प्रयास कर रहे हैं। इस वर्ष के दौरान हमने यूलिप पोर्टफोलियो में 6 प्रतिशत की वृद्धि की है, लेकिन अन्य खंडों में वृद्धि इससे अधिक है। इसकी वजह से समग्र वृद्धि 13 प्रतिशत हुई है।’

वित्त वर्ष 2026 में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के व्यक्तिगत एपीई में लगभग 44 प्रतिशत हिस्सेदारी यूलिप की थी, जो एक साल पहले 39 प्रतिशत थी। हालांकि खुदरा सुरक्षा व्यवसाय में सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे व्यक्तिगत एपीई में सुरक्षा पॉलिसियों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 के 5 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई। कंपनी ने कहा कि जीएसटी छूट के बाद कम मूल्य निर्धारण और एक मजबूत उत्पाद पोर्टफोलियो ने सुरक्षा उत्पादों में वृद्धि का समर्थन किया है, जबकि ग्राहकों को धीरे-धीरे दीर्घकालिक बचत और सुरक्षा प्रस्तावों का रुख करने में मदद मिली।

प्रबंधन ने कहा, ‘हम जीएसटी में बदलाव के साथ वित्त वर्ष 2027 में प्रवेश कर रहे हैं जो काफी हद तक पूरा हो चुका है। हमारा एजेंसी चैनल पहुंच, उत्पादकता और व्यवसाय की गुणवत्ता के मामले में एक साल पहले की तुलना में आज मजबूत है। संरक्षण पोर्टफोलियो हमारी यात्रा के किसी भी अन्य पूर्व बिंदु की तुलना में ढांचागत रूप से बड़ा और अधिक सार्थक है।

विश्लेषकों ने कहा कि बीमाकर्ता यूलिप पॉलिसियों पर सुरक्षा संबंधी शर्तें भी जोड़ रही हैं, जिससे नए व्यवसाय (वीएनबी) को समर्थन मिल सके।

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First Published - May 18, 2026 | 7:55 AM IST

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