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RBI की बड़ी राहत: छोटी NBFC को पंजीकरण से छूट, इक्विटी बाजारों में बढ़ेगा निवेश

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बाजार के भागीदारों और ब्रोकरों का कहना है कि कई कंपनियां और संस्थाएं गलती से एनबीएफसी बन जाने के जोखिम के कारण इक्विटी बाजारों से दूर रहती थीं

Last Updated- May 15, 2026 | 10:06 PM IST
NBFC
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कुछ छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पंजीकरण की जरूरत से छूट देने का ऐलान किया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इससे इक्विटी बाजारों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। 

बाजार के भागीदारों और ब्रोकरों का कहना है कि कई कंपनियां और संस्थाएं गलती से एनबीएफसी बन जाने के जोखिम के कारण इक्विटी बाजारों से दूर रहती थीं। लेकिन अब वे बाजार में शायद ज्यादा सक्रियता दिखाएंगी। इन संस्थाओं को वित्तीय संपत्तियों से जुड़ी आय की सीमा पार कर जाने का डर रहता था। इससे उनके लिए पंजीकरण करवाना जरूरी हो जाता था। 

बीसीबी ब्रोकरेज के प्रबंध निदेशक उत्तम बागड़ी ने कहा, ‘इस कदम से उन कंपनियों और इकाइयों को ज्यादा राहत मिलेगी जो अनुपालन पर बहुत अ​धिक ध्यान देती हैं और जो पहले पूंजी बाजार में पूरी तरह से हिस्सा लेने से हिचकिचाती थीं। उन्हें इस बात का डर रहता था कि कहीं वे अनजाने में ही एनबीएफसी वर्गीकरण के नियमों के दायरे में न आ जाएं।’

बागड़ी ने कहा कि ब्रोकिंग उद्योग में कई ऐसे जायज कारोबार हैं, जो अनजाने में ही एनबीएफसी के दायरे में आ गए, सिर्फ इसलिए कि वे वित्तीय संपत्तियों और आय से जुड़ी कुछ तकनीकी सीमाओं की जद में आ गए थे, जबकि असल में उनका न तो कोई कर्ज देने का काम था और न ही ग्राहकों से जुड़ी वित्तीय गतिविधियां। 

अप्रैल में आरबीआई ने उन एनबीएफसी को पंजीकरण से छूट देने की घोषणा की थी जो सार्वजनिक धन नहीं जुटाती हैं, जिनका ग्राहकों से लेनदेन नहीं है और जिनकी परिसंप​त्तियां 1,000 करोड़ रुपये से कम हैं।  इन इकाइयों को ‘अनरजिस्टर्ड टाइप 1 एनबीएफसी’ के तौर पर वर्गीकृत किया जाएगा। ये नियम 1 जुलाई से लागू होंगे।

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ब्रोकिंग समुदाय ने आरबीआई की इस रियायत का स्वागत किया है। इससे भारत के पूंजी बाजार तंत्र में मजबूती और भागीदारी के स्तरों के लिए सकारात्मक ढांचे को बढ़ावा मिलेगा।

अल्फा पार्टनर्स में मैनेजिंग पार्टनर अक्षत पांडे ने कहा, ‘कई ऐसी इकाइयां हैं, खासकर प्रमोटर निवेश कंपनियां, पारिवारिक निवेश संरचनाएं, ट्रेजरी फर्में और पैसिव होल्डिंग कंपनियां, जो पहले इक्विटी बाजार में अपना निवेश बढ़ाने को लेकर सतर्क रहती थीं। उन्हें डर रहता था कि कहीं अनजाने में उन पर एनबीएफसी वर्गीकरण के नियम लागू न हो जाएं। आरबीआई के इस कदम से नियमों को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिली है। इससे उन्हें अपनी अतिरिक्त पूंजी को सूचीबद्ध इक्विटी और बाजार के अन्य साधनों में निवेश करने में अ​​धिक सहजता महसूस होनी चाहिए।’

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पांडे ने कहा कि पंजीकृत न होने के बावजूद, ये संस्थाएं आरबीआई अधिनियम 1934 के अध्याय आईआईआईबीबी के तहत ही संचालित होती रहेंगी, जिससे जोखिम सामने आने पर आरबीआई को विशिष्ट दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार मिलेगा।

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First Published - May 15, 2026 | 10:00 PM IST

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