भारत के बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (IRDAI ) के चेयरमैन अजय सेठ ने बीमा के कमीशन में भारी वृद्धि पर हस्तक्षेप की जरूरत पर जोर दिया। प्राधिकरण ने अपनी 133वीं बैठक का गुरुवार को लिखित ब्योरा जारी किया।
सेठ ने इस बैठक में कहा था कि बीमा उद्योग में कमीशन में हुई तीव्र वृद्धि से संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र संरचनात्मक रूप से उच्च लागत वाला बना हुआ है। इसकी वृद्धि अभी भी लागत-कुशल डिजिटल परिवर्तन के बजाए महंगे मध्यस्थ आधारित वितरण पर बहुत अधिक निर्भर है। लिहाजा यह ऐसा क्षेत्र बन गया है जिस पर नियामक के ध्यान की जरूरत है।
सेठ ने कहा, ‘दीर्घकालिक उत्पादों में उच्च अग्रिम अधिग्रहण लागत पॉलिसीधारक के मूल्य को कम कर देती है। इससे शुरुआती वर्षों में कम परिसंपत्ति निर्माण होता है और समय से पहले बाहर निकलने पर न्यूनतम सरेंडर वैल्यू प्राप्त होती है। यह लागत संरचना विश्वास और निरंतरता को कमजोर करती है।
इसका कारण यह है कि समय से पहले बाहर निकलने पर पॉलिसीधारक की मूल राशि प्रभावी रूप से समाप्त हो जाती है और साथ ही क्षेत्र के समग्र मूल्य भी कम हो जाता है।’ उन्होंने अन्य क्षेत्रों में भी नियामक ध्यान और हस्तक्षेप की जरूरत पर बल दिया।