आने वाले कुछ सत्रों के लिए सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के हाजिर चांदी की कीमतों से प्रीमियम पर ट्रेड करने की संभावना है। ऐसा इसलिए है क्योंकि म्युचुअल फंड (एमएप) उद्योग को हाजिर चांदी के बाजार में आपूर्ति की संभावित कमी का अंदेशा है, खासकर अगर नए लगाए गए आयात प्रतिबंधों के बाद मांग में अचानक तेजी आती है।
सरकार की तरफ से चांदी के आयात पर पाबंदी लगाए जाने के बाद चांदी के ईटीएफ के लिए सोमवार पहला कारोबारी सत्र होगा। आयात पाबंदी में चांदी की वो बार्स भी शामिल हैं, जो चांदी के ईटीएफ का आधार होती हैं। चांदी के ईटीएफ को घरेलू चांदी की कीमतों को ट्रैक करने के लिए डिजायन किया गया है, लेकिन बहुत ज्यादा मांग या आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों के समय इनकी कीमतें अलग हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में, ईटीएफ की ट्रेडिंग एक्सचेंज पर चांदी की कीमतों से काफी ज्यादा प्रीमियम पर होती है क्योंकि वे नए यूनिट बनाने और निवेशकों की अचानक बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए सही कीमत पर पर्याप्त चांदी की बार्स नहीं खरीद पाते हैं।
मौजूदा नियमों के तहत, गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ नई यूनिट्स तभी जारी कर सकते हैं, जब वे उतनी ही मात्रा में असली सोना या चांदी खरीद लें। नई यूनिट्स की गैर-मौजूदगी में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की कीमतें अंतर्निहित संपत्ति के असली मूल्य के बजाय एक्सचेंज में मौजूद यूनिट्स की मांग और आपूर्ति की स्थिति से नियंत्रित होने लगती हैं।
म्युचुअल फंड के अधिकारियों के अनुसार, जहां भारत में चांदी का काफी उत्पादन होता है और अभी सप्लायर्स के पास चांदी के बार उपलब्ध हैं, वहीं मांग में अचानक तेजी आने पर ईटीएफ मैनेजर्स को कीमतों को उनके असल मूल्य के हिसाब से बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है। एक सीनियर फंड मैनेजर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, सोने के उलट भारत में चांदी का उत्पादन काफी ज्यादा होता है। साथ ही, औद्योगिक आयात जारी रहने और रीसाइक्लिंग बढ़ने की संभावना है। लेकिन हां, घरेलू प्रीमियम बढ़ सकता है।
एक अन्य अधिकारी के अनुसार, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार निवेश के मकसद से चांदी के आयात के लिए लाइसेंस देगी या नहीं। उन्होंने कहा कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती और आपूर्ति स्थिर नहीं हो जाती, तब तक हाजिर चांदी और ईटीएफ दोनों ही एक्सचेंज की कीमतों से ज्यादा दाम पर बिकेंगे। अधिकारी ने कहा, हालांकि कीमती धातुओं के व्यापारियों के अनुसार उनके पास चांदी की सिल्लियों का पर्याप्त स्टॉक है और वे दूसरे माध्यमों से लिक्विडिटी बनाए रखने की कोशिश करेंगे, लेकिन इन पाबंदियों को देखते हुए यह संभावना है कि सोमवार से हाजिर चांदी और इस वजह से चांदी के ईटीएफ दोनों ही ऊंचे स्तर पर बिकना शुरू हो जाएंगे।
पिछले हफ़्ते, हाजिर सोना और चांदी एमसीएक्स फ्यूचर्स के मुकाबले डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे थे। यह डिस्काउंट सोने और चांदी के ईटीएफ की कीमतों में भी दिखा। कीमतों में यह गिरावट, सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 16 फीसदी किए जाने के बाद आयातक और संस्थागत निवेशकों द्वारा माल बेचने का नतीजा थी।
सिल्वर ईटीएफ को हाल ही में फिजिकल सिल्वर की सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अक्टूबर में कई हफ्तों तक कई सिल्वर ईटीएफ, हाजिर कीमतों और अपनी नेट ऐसेट वैल्यू (एनएवी) के मुकाबले काफी ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड करते रहे। इसकी वजह यह थी कि निवेशकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हाजिर सिल्वर की उपलब्धता काफी नहीं थी।
कैलेंडर वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में सिल्वर ईटीएफ में रिकॉर्ड निवेश आया क्योंकि सिल्वर की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी ने लाखों नए निवेशकों को इस श्रेणी की ओर आकर्षित किया। ईटीएफ की कीमतों में लगातार बने रहे इस प्रीमियम की वजह से कई फ़ंड हाउसों ने अपने सिल्वर फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) में नया निवेश लेना बंद कर दिया। हालांकि म्युचुअल फंड सीधे ईटीएफ में निवेश को प्रतिबंधित नहीं कर सकते क्योंकि इनका कारोबार स्टॉक एक्सचेंजों पर होता है।