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गुणवत्ता से समझौता किए बिना मुनाफा कमाने पर ध्यान, येस बैंक का फोकस अब रिटेल लोन ग्रोथ पर

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इस महीने के शुरू में येस बैंक के एमडी एवं सीईओ की कमान संभालने वाले विनय टोंसे का कहना है कि परिसंपत्ति गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए उनकी नजर खुदरा ऋण वृद्धि पर रहेगी

Last Updated- April 20, 2026 | 11:17 PM IST
Yes Bank

इस महीने के शुरू में येस बैंक के एमडी एवं सीईओ की कमान संभालने वाले विनय टोंसे का कहना है कि परिसंपत्ति गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए उनकी नजर खुदरा ऋण वृद्धि पर रहेगी। तोनसे ने कहा कि इससे बैंक को मार्जिन सुधारने में मदद मिलेगी। तोनसे और बैंक के समूह मुख्य वित्तीय अधिकारी निरंजन बनोदकर से मनोजित साहा ने उनकी प्राथमिकताओं पर बात की। मुख्य अंश:

बैंक ने अपने लिए फिलहाल क्या प्राथमिकताएं तय की हैं?

टोंसे: बैंक की बुनियाद काफी मजबूत लग रही है। प्राथमिकताओं में निश्चित रूप से हमारी देनदारियों के साथ परिसंपत्तियों को बढ़ाना शामिल होंगे। एक बात जो मेरे लिए बिल्कुल स्पष्ट है वह यह है कि हम कारोबार वृद्धि पर जरूर ध्यान देंगे मगर गुणवत्ता के साथ। कार्यभार में बदलाव से मेरी सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। हम जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे गुणवत्ता में गिरावट आए। जब मैं गुणवत्ता की बात करता हूं तो यह केवल परिसंपत्तियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देनदारियों पर भी लागू होती है।

पिछले कुछ वर्षों में विशेष रूप से पिछले एक वर्ष में मैंने बहुत अच्छा काम होते देखा है। निश्चित रूप से मुनाफा कमाने के साथ मजबूत कारोबार हमारी प्राथमिकता है। दूसरी अहम बात यह होगी कि हम एसएमबीसी के सहयोग का कितना अच्छा उपयोग कर सकते हैं या उससे कितना अच्छा समर्थन प्राप्त कर सकते हैं। यह भी एक ऐसा पहलू है जिस पर मैं ध्यान केंद्रित कर रहा हूं।

ऋण आवंटन में वृद्धि की बात करें तो खुदरा ऋणों में एक अंक की वृद्धि हो रही थी। क्या आप खुदरा ऋण वृद्धि और मजबूत करना चाहेंगे?

टोंसे: अगर आप इस बैंक के इतिहास को देखें तो यह हमेशा से एक कॉरपोरेट बैंक रहा है। पिछले पांच-छह वर्षों में कॉरपोरेट क्षेत्र में हमारी भागीदारी कम हुई है और हमने खुदरा क्षेत्र में कदम रखा है। हमारा ध्यान मुख्य रूप से खुदरा क्षेत्र पर ही रहेगा। खास कर हमारे पास बैंक शाखाओं का मजबूत तंत्र है जिसका मैं पूरा इस्तेमाल करना करना चाहता हूं और इनसे अधिकतम लाभ प्राप्त करना चाहता हूं। डिजिटल रूप से हम बेहद मजबूत हैं मगर हम यह भी मानते हैं कि ग्राहकों के साथ सीधा संपर्क बना रहना चाहिए। ग्राहक के साथ अंतिम जुड़ाव होना जरूरी है जो डिजिटल माध्यम से पूरी तरह संभव नहीं हो पाता है। हम ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाएंगे।

निरंजन बनोदकर: आप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि पिछली कुछ तिमाहियों से खुदरा बैंकिंग की वृद्धि दर एक अंक में रही है। मगर अगर आप इस पोर्टफोलियो में आई रफ्तार पर नजर डालें तो यह लगातार बेहतर हो रही है। पिछली दो-तीन तिमाहियों में हमें स्पष्ट रूप से पता चल गया है कि किन योजनाओं में तेजी दिख रही है। ऋण आवंटन दर को देखें तो यह वास्तव में काफी मजबूत है। अगर आप खुदरा बैंकिंग में क्रमिक वृद्धि दर देखें तो यह 4 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

वर्तमान में कुल ऋण पोर्टफोलियो में खुदरा ऋण की कितनी हिस्सेदारी है?

निरंजन बनोदकर: मुझे लगता है कि खुदरा और थोक ऋण में हमारा हिस्सा काफी संतुलित है। खुदरा ऋण की कुल हिस्सेदारी लगभग 46 फीसदी है। वाणिज्यिक बैंकिंग लगभग 26 फीसदी है और कॉरपोरेट और संस्थागत बैंकिंग की हिस्सेदारी लगभग 28 फीसदी है।

आपके मुताबिक खुदरा ऋण की हिस्सेदारी 50 फीसदी का आंकड़ा कब पार कर जाएगी?

निरंजन बनोदकर: कम से कम निकट भविष्य में। वृद्धि के आंकड़ों को देखते हुए हमें लगता है कि वर्तमान में जो हिस्सेदारी है वह काफी संतुलित है। मुझे लगता है कि यह लगभग 1 या 2 फीसदी के उतार-चढ़ाव के दायरे में ही रहेगी मगर मुझे लगता है कि यह एक काफी संतुलित और वविधता के साथ काफी सहज स्तर पर है।

खुदरा क्षेत्र में आप किस खंड में तेज रफ्तार से कारोबार बढ़ाना चाहते हैं?

निरंजन बनोदकर: दो साल पहले असुरक्षित ऋण क्षेत्र में पूरे उद्योग में परिसंपत्ति गुणवत्ता संबंधी चुनौतियां केवल हमारे लिए ही थीं। और हमने कहा था कि हम अपनी गति धीमी कर रहे हैं।अब इससे हमें इन सभी खंडों में कारोबार मजबूती के साथ बढ़ाने का आत्मविश्वास हासिल हुआ है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम किसी विशेष खंड से पीछे हटना चाहते हैं या इसमें गति धीमी करना चाहते हैं। अब हम सभी उत्पाद खंडों में सहज महसूस कर रहे हैं क्योंकि हमारा मानना है कि इनमें से प्रत्येक खंड में मजबूत नतीजे हासिल प्राप्त करने के लिए सही कारक मौजूद हैं।

क्या असुरक्षित खंडो में भी?

निरंजन बनोदकर: निश्चित रूप से, हम असमान रूप से विकास नहीं करेंगे मगर यह हमारी समग्र विकास आकांक्षा के अनुरूप बढ़ता रहेगा।

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First Published - April 20, 2026 | 10:41 PM IST

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