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चौधरी की गिरफ्तारी से बैंकिंग जगत हैरान

Last Updated- December 11, 2022 | 11:50 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी की गिरफ्तारी से बैंकिंग क्षेत्र पर गंभीर असर पडऩे की आशंका के बीच इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) मामले को जल्द ही वित्त मंत्रालय और राजस्थान सरकार के समक्ष उठाएगी ताकि इसका जल्द से जल्द समाधान किया जा सके।
बीते रविवार को राजस्थान पुलिस ने चौधरी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) गोडावण होटल को अलकेमिस्ट एआरसी को कम मूल्य पर बेचने के आरोप में की गई है। होटल के पूर्व निदेशकों द्वारा जैसलमेर के मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर शिकायत याचिका के आधार पर की गई है।
आईबीए के मुख्य कार्याधिकारी सुनील मेहता ने कहा कि संपत्तियों को पट्टे पर देना और बिक्री करना वित्तीय निर्णय होता है। यह निर्णय जांच-परख के सख्त नियमों का पालन करते हुए लिया जाता है। इस तरह की गिरफ्तारी गंभीर मामला है और एसोसिएशन इस मामले को वित्तीय सेवाओं के विभाग तथा राजस्थान सरकार के समक्ष उठाएगा। मेहता ने कहा कि आईबीए की प्रबंधन समिति ने भी चिंता जताई है और मामले का निपटारा करने की मांग की है।
एनपीए को बेचने के 20 मार्च, 2014 का निर्णय भारतीय स्टेट बैंक और अलकेमिस्ट ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी ने उचित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया था।
अलकेमिस्ट एआरसी के मुख्य परिचालन अधिकारी मनीश निहलानी ने कहा कि बिना कोई समन या नोटिस के जैसलमेर अदालत ने शिकायतकर्ताओं की याचिका स्वीकार करते हुए चौधरी और एआरसी के प्रवर्तक आलोक धीर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।
एसबीआई ने बयान में कहा कि गढ़ राजवाड़ा होटल परियोजना को 2007 में एसबीआई ने ऋण दिया था। कंपनी के प्रमुख प्रवर्तक के अप्रैल 2010 में मृत्यु के बाद जून से यह ऋण खाता एनसीए में तब्दील हो गया। ऋण वसूली का प्रयास विफल रहने के बाद मार्च 2014 में एआरसी को बकाया वसूली का काम सौंपा गया था।

First Published - November 1, 2021 | 11:08 PM IST

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