facebookmetapixel
Budget 2026: सीमा-शुल्क सुधारों से रत्न और आभूषण उद्योग को नई रफ्तार, निर्यात और ई-कॉमर्स को मिलेगा बढ़ावाBudget 2026: लिथियम बैटरी पर सीमा-शुल्क छूट से EV इंफ्रास्ट्रक्चर को मदद मिलेगी, ऑटो इंडस्ट्री ने किया स्वागतBudget 2026: पढ़ाई से लेकर कमाई तक! बजट में स्टूडेंट्स के लिए 5 बड़ी घोषणाएं, जिससे बदलेगा भविष्यसरकारी खजाने में पैसा कहां से आया, गया कहां; ₹1 के कैलकुलेशन से समझें बजट का पूरा लेखा-जोखाBudget 2026: SGB पर नियम बदले, एक्सचेंज से खरीदे बॉन्ड पर टैक्स लगेगा; टैक्स-फ्री एग्जिट का रास्ता बंदकर्ज लेकर शेयर या म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं? बजट में सरकार ने दे दिया बड़ा झटकाBudget 2026: कंटेंट क्रिएटर लैब्स, एनिमेशन से लेकर स्पोर्ट्स तक, इस बार में बजट में Gen Z के लिए क्या-क्या है?Budget 2026: बड़ी राहत! सीतारमण का ऐलान- मोटर एक्सीडेंट क्लेम के ब्याज पर अब नहीं लगेगा टैक्सBudget-Real Estate: बजट से रियल एस्टेट को तुरंत फायदा कम, लेकिन लंबी अव​धि में होगा लाभBudget 2026: बजट 2026 से बदलेगा भारत, वित्त मंत्री ने गिनाए बड़े फायदे

केंद्र की शर्तों के साथ राज्यों को धन, इस तरह से मिलेंगे 1.3 लाख करोड़ रुपये

Last Updated- March 12, 2023 | 7:43 PM IST

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान राज्यों के पूंजीगत व्यय (capex) की जरूरतों के लिए दिए जा रहे 1.3 लाख करोड़ रुपये दीर्घावधि ऋण पर केंद्र सरकार ने कड़ी शर्तें लगाई हैं। केंद्र की कोशिश है कि फंड का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके।

इस 1.3 लाख करोड़ रुपये में से 1 लाख करोड़ रुपये ‘यूनाइडेड फंड’ होगा और शेष धनराशि विशेष मकसद जैसे पुराने सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग, शहरी योजना में सुधार और कार्रवाई, शहरी स्थानीय निकाय को म्युनिसिपल बॉन्डों के लिए विश्वसनीय बनने के लिए के वित्तपोषण में सुधार, पुलिस कर्मियों के लिए आवास, युटिलिटी मॉल्स का निर्माण, बच्चों व किशोरों के लिए पुस्तकालयों का निर्माण और केंद्रीय योजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी पर होने वाले पूंजीगत व्यय में इस्तेमाल होगी।

बहरहाल यूनाइटेड फंड में भी शर्तें लगाई गई हैं, जिससे राज्य पूंजीगत व्यय परियोजनाओं में धन का प्रभावी तरीके से खर्च सुनिश्चित करें। वित्त मंत्रालय की ओर से फरवरी में राज्यों को भेजे गए दिशानिर्देशों के मुताबिक यूनाइटेड फंड की लाख करोड़ रुपये की राशि तीन किस्तों में विभाजित की जाएगी, जो मोटे तौर पर 33,333 करोड़ रुपये की होगी।

राज्यों की पूंजीगत व्यय परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद पहली किस्त दी जाएगी। अगर चालू वित्त वर्ष 2022-23 में राज्यों को कोई पूंजीगत व्यय समर्थन दिया गया है और वह अप्रैल तक लंबित रहता है तो उतनी राशि पहली किस्त से घटा दी जाएगी।

जब पहली किस्त में दी गई राशि में से राज्य कम से कम 75 प्रतिशत खर्च कर लेंगे तो दूसरी किस्त दी जाएगी। वहीं पहली दो किस्तों का 75 प्रतिशत खर्च किए जाने और राज्यों के वित्त वर्ष 24 के पूंजीगत व्यय के लक्ष्य का 45 प्रतिशत खर्च होने पर तीसरी किस्त दी जाएगी। इन लक्ष्यों को केंद्र द्वारा किए गए पूंजीगत व्यय समर्थन से बाहर रखा जाएगा।

राज्यों को भेजे गए दिशानिर्देश में केंद्र सरकार ने कहा है कि अगर कोई राज्य 30 सितंबर 2023 तक के पूंजीगत व्यय के आधार पर तीसरी किस्त लेता है, लेकिन बाद में वित्त वर्ष 24 के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता है और योजना उस साल जारी रहती है, तो उस राज्य को दी गई पूरी तीसरी किस्त या तो उनकी उधारी सीलिंग से या वित्त वर्ष 23 की योजना में से काट ली जाएगी।

राज्यों को 1 लाख करोड़ रुपये यूनाइटेड फंड उसी फॉर्मूले से राज्यों को दिया जाना है, जिसका इस्तेमाल केंद्रीय करों के विभाजन वाले मद के धन के बंटवारे के लिए किया जाता है।

इस तरह से अधिकतम राशि उत्तर प्रदेश (17,939 करोड़ रुपये), बिहार (10,058 करोड़ रुपये), मध्य प्रदेश (7,850 करोड़ रुपये), पश्चिम बंगाल (7,523 करोड़ रुपये) और महाराष्ट्र (6,317 करोड़ रुपये) को मिलेगी।

वहीं शेष 30,000 करोड़ रुपये के बंधे कोष में से 3,000 करोड़ रुपये पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग, 15,000 करोड़ रुपये शहरी योजना सुधार, म्युनिसिपल बॉन्डो को विश्वसनीय बनाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये शहरी स्थानीय निकायों के वित्तपोषण में सुधार, 2,000 करोड़ रुपये पुलिस के आवास, 5,000 करोड़ रुपये युटिलिटी मॉल के निर्माण और 5,000 करोड़ रुपये बच्चों व किशोरों के लिए पुस्तकालय बनाने और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में खर्च के लिए आवंटित किया गया है।

अगर राज्य सरकारें केंद्र प्रायोजित परियोजना में अपने हिस्से की धनराशि जारी करने में देरी करती हैं तब भी कुछ मामलों में उन्हें हतोत्साहित किया जाएगा। ऐसे मामले में राज्य की दूसरी किस्त की 15 प्रतिशत राशि काट ली जाएगी।

2023 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विस्तारित योजना की घोषणा की थी, जिसे जारी रखने की मांग राज्य सरकारें कर रही थीं। सीतारमण ने कहा था, ‘मैंने बुनियादी ढांचा योजनाओं में निवेश तेज करने के लिए एक और साल के लिए राज्य सरकारों को 50 साल का ब्याजरहित कर्ज जारी रखने का फैसला किया है। यह पूरक नीतिगत कार्रवाई के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने हेतु है। इसके लिए आवंटन बढ़ाकर 1.3 लाख करोड़ रुपये किया गया है।’

First Published - March 12, 2023 | 7:43 PM IST

संबंधित पोस्ट