हर साल बजट के साथ देश के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि सरकार के पास पैसा आखिर आता कहां से है और खर्च कहां होता है। बजट 2026-27 इस सवाल का जवाब पूरी साफगोई और गंभीरता के साथ देता है। बजट दस्तावेज बताता है कि सरकार की कमाई और खर्च दोनों के पीछे बड़ी मजबूरियां और बड़ी जिम्मेदारियां जुड़ी हैं।
सरकार को मिलने वाले हर एक रुपये में सबसे बड़ा हिस्सा कर्ज से आता है। बजट 2026-27 के मुताबिक, हर 1 रुपये में से 24 पैसे सरकार उधार लेकर जुटाएगी। इसका मतलब यह है कि सरकार को अपने खर्च चलाने के लिए बड़े पैमाने पर कर्ज पर निर्भर रहना पड़ेगा। इसके बाद टैक्स से होने वाली कमाई आती है, जहां आम लोगों और कंपनियों की जेब से सरकारी खजाना भरता है।
इनकम टैक्स से सरकार को 21 पैसे और कॉरपोरेट टैक्स से 18 पैसे मिलने का अनुमान है। इसके अलावा जीएसटी और दूसरे टैक्स से 15 पैसे की आमदनी होगी, जो रोजमर्रा की खरीदारी और कारोबार से जुड़ी है।
सरकारी आमदनी के दूसरे स्रोत छोटे जरूर हैं, लेकिन जरूरी हैं। कस्टम ड्यूटी से 4 पैसे और एक्साइज ड्यूटी से 6 पैसे जुटाए जाएंगे। वहीं फीस, डिविडेंड और ब्याज जैसे नॉन टैक्स रेवेन्यू से सरकार को 10 पैसे मिलेंगे। नॉन डेट कैपिटल रिसीट से सिर्फ 2 पैसे की आमदनी होगी, जो यह दिखाती है कि कर्ज के अलावा सरकार के पास सीमित विकल्प बचे हैं।
| सोर्स | हिस्सा (पैसे में) |
|---|---|
| कर्ज और अन्य देनदारियां | 24 पैसे |
| इनकम टैक्स | 21 पैसे |
| कॉरपोरेट टैक्स | 18 पैसे |
| जीएसटी और अन्य टैक्स | 15 पैसे |
| नॉन टैक्स रेवेन्यू (फीस, डिविडेंड, ब्याज) | 10 पैसे |
| एक्साइज ड्यूटी | 6 पैसे |
| कस्टम ड्यूटी | 4 पैसे |
| नॉन डेट कैपिटल रिसीट | 2 पैसे |
(सोर्स: बजट दस्तावेज 2026)
सरकार के खर्च की बात करें तो बजट की सबसे बड़ी प्राथमिकता राज्यों को टैक्स में उनका हिस्सा देना है। सरकार के हर 1 रुपये में से 22 पैसे सीधे राज्यों को सौंपे जाएंगे। यह पैसा राज्यों की योजनाओं, विकास कार्यों और रोजमर्रा के प्रशासन में इस्तेमाल होगा। इसके बाद सबसे बड़ा खर्च पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने का है। बजट के मुताबिक, हर 1 रुपये में से 20 पैसे सिर्फ ब्याज भुगतान में चले जाएंगे, जो सरकार पर कर्ज के भारी बोझ को साफ दिखाता है। इसके अलावा सरकार केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं पर 17 पैसे खर्च करेगी, जिनमें गरीबों, किसानों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
देश की सुरक्षा के लिए रक्षा पर 11 पैसे खर्च किए जाएंगे, जबकि बड़ी सब्सिडी पर 6 पैसे रखे गए हैं। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 8 पैसे और वित्त आयोग व अन्य ट्रांसफर के लिए 7 पैसे खर्च होंगे।
सरकार को पेंशन की जिम्मेदारी भी निभानी है। सिविल पेंशन पर 2 पैसे खर्च होंगे, जबकि अन्य जरूरी और प्रशासनिक खर्चों के लिए 7 पैसे अलग रखे गए हैं। ये खर्च छोटे दिख सकते हैं, लेकिन मिलकर बजट पर बड़ा असर डालते हैं।
| खर्च का मद | हिस्सा (पैसे में) |
|---|---|
| राज्यों को टैक्स में हिस्सा | 22 पैसे |
| कर्ज पर ब्याज भुगतान | 20 पैसे |
| केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं | 17 पैसे |
| रक्षा खर्च | 11 पैसे |
| केंद्र प्रायोजित योजनाएं | 8 पैसे |
| वित्त आयोग व अन्य ट्रांसफर | 7 पैसे |
| बड़ी सब्सिडी | 6 पैसे |
| सिविल पेंशन | 2 पैसे |
| अन्य खर्च | 7 पैसे |
(सोर्स: बजट दस्तावेज 2026)
कुल मिलाकर बजट 2026-27 की तस्वीर यह बताती है कि सरकार एक तरफ कर्ज और टैक्स के सहारे अपनी कमाई जुटा रही है, तो दूसरी तरफ राज्यों, ब्याज और योजनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। हर रुपया कई दावेदारों के बीच बंटा हुआ है और यही इस बजट की सबसे बड़ी कहानी है।