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‘बेकारों की लॉकडाउन पीढ़ी बनने का खतरा’

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:16 AM IST

देश में कोविड-19 महामारी के कारण 41 लाख युवाओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। इसमें निर्माण और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी सर्वाधिक प्रभावित हुए। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की संयुक्त रिपोर्ट में यह कहा गया है।
‘एशिया और प्रशांत क्षेत्र में कोविड-19 युवा रोजगार संकट से निपटना’ शीर्षक से आईएलओ-एडीबी की आज जारी रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत में 41 लाख युवाओं के रोजगार जाने का अनुमान है। सात प्रमुख क्षेत्रों में से निर्माण और कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक लोगों के रोजगार गए हैं।’
इसमें कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं को भी तगड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट के अनुसार संकट के कारण तत्काल 15 से 24 साल के युवा 25 और उसे अधिक उम्र के लोगों के मुकाबले ज्यादा प्रभावित होंगे। इतना ही नहीं आर्थिक और सामाजिक लागत के हिसाब से जोखिम दीर्घकालिक और व्यापक है। आईएलओ-एडीबी रिपोर्ट ‘युवा और कोविड-19 पर वैश्विक सर्वे’ के क्षेत्रीय आकलन पर आधारित है। अनुमान विभिन्न देशों में उपलब्ध बेरोजगारी के आंकड़े के आधार लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत में महामारी के दौरान कंपनी के स्तर पर दो तिहाई प्रशिक्षण (एप्रेन्टिसशिप) पर असर पड़ा। वहीं तीन चौथई ‘इंटर्नशिप’ पूरी तरह से बाधित हुए हैं। रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका और आईएलओ क्षेत्रीय आर्थिक एवं सामाजिक विश्लेषण इकाई प्रमुख सारा एल्डर ने कहा, ‘कोविड-19 संकट के बाद से जो चुनौतियां युवाओं के लिए थीं, वह और बढ़ गई हैं। अगर इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, एक ‘लॉकडाउन पीढ़ी’ सृजित होने का खतरा है, जिसे इस संकट का भार कई साल तक महसूस करना पड़ सकता है।’

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First Published - August 19, 2020 | 1:03 AM IST

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