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मुआवजा उपकर में भारी कमी!

Last Updated- December 12, 2022 | 4:32 AM IST

सरकार का अनुमान है कि कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण आर्थिक गतिविधियों में बाधा पडऩे से जून में वस्तु एवं सेवा कर संग्रह (जीएसटी) 1 लाख करोड़ रुपये से कम रह सकता है। ऐसा हुआ तो लगातार दूसरे साल राज्यों को दिया जाने वाला मुआवजा कुल मुआवजा उपकर संग्रह से ज्यादा रह सकता है।
केंद्र को 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये के आसपास मुआवजा राज्यों के खाते में डालना पड़ सकता है। मगर उपकर मद में केवल 1 लाख करोड़ रुपये आने का अनुमान बजट में लगाया गया था। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि उपकर संग्रह करीब 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये कम रह सकता है। ऐसे में सरकार को पिछले साल की तरह इस बार भी मुआवजे की भरपाई के लिए बाजार से उधार लेना पड़ सकता है।
मगर यह भी माना जा रहा है कि केंद्र समूची कमी की भरपाई नहीं करेगा और केवल जीएसटी क्रियान्वयन के कारण हुई कमी को उधारी से भरेगा। कोविड-19 के कारण आई कमी की भरपाई के लिए राज्यों को पिछले साल की तरह उधारी लेने की सुविधा दी जा सकती है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘अप्रैल और मई में ई-वे बिल जारी करने में आई कमी से संकेत मिलता है कि मई में राजस्व संग्रह अप्रैल की तुलना में करीब 30 फीसदी कम रह सकता है और जून में यह 1 लाख करोड़ रुपये से कम रह सकता है। औद्योगिक राज्यों में आर्थिक गतिविधियां धीमी हैं। मांग भी जुलाई से आनी शुरू हो सकती हैं, जिससे आगे कर संग्रह बढ़ सकता है।’ उन्होंने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे उत्पादक राज्यों में
स्थानीय लॉकडाउन खत्म होने के बाद कर संग्रह में सुधार आएगा। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों की एक टीम इस साल जीएसटी संग्रह में कमी और मुआवजे की जरूरत का अनुमान लगा रही है।    
अधिकारियों की रिपोर्ट इस शुक्रवार को जीएसटी परिषद की बैठक में रखी जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘देखना होगा कि कोविड-19 के कारण कर संग्रह में कितनी कमी आ रही है और जीएसटी क्रियान्वयन की वजह से कर संग्रह कितना कम रहा। अगर कर संग्रह में कमी की भरपाई के लिए पूरी राशि उधार ली जाती है तो प्रतिफल पर असर पड़ेगा।’ इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि पिछले साल की पहली तिमाही की तुलना में इस साल पहली तिमाही में राज्य जीएसटी संग्रह दोगुना होने का अनुमान है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि वित्त वर्ष 2022 में 2.5 से 2.7 लाख करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजा देना पड़ेगा।इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत का अनुमान है कि करीब 3 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा देना पड़ेगा, जिसमें से केवल 1 लाख करोड़ रुपये मुआवजा उपकर से मिलेंगे। पंत ने कहा कि स्थानीय लॉकडाउन से कर संग्रह पर थोड़ा-बहुत असर पड़ेगा। लेकिन वित्त वर्ष 2022 की पहली छमाही में जीएसटी संग्रह में वृद्घि दो अंक में हो सकती है।
अलबत्ता मुआवजा उपकर में करीब 2 लाख करोड़ रुपये कमी हो सकती है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू करते समय राज्यों का कर संग्रह सालाना 14 फीसदी बढऩे का अनुमान लगाया गया था और इसमें कमी आने पर पांच साल तक भरपाई का वादा किया गया था। इसीलिए जीएसटी ढांचे में मुआवजा उपकर की व्यवस्था की गई है, जिसे 28 फीसदी कर श्रेणी वाली वस्तुओं जैसे वाहन, सिगरेट, कार्बोनेटेड पेय आदि पर लगाया जाता है।पिछले साल केंद्र ने 2020-21 में उपकर संग्रह में 2.35 लाख करोड़ रुपये कमी का अनुमान लगाया था, जिनमें से 1.1 लाख करोड़ रुपये जीएसटी क्रियान्वयन से संबंधित थे और बाकी कमी कोरोना के कारण आई थी। ऐसे में केंद्र ने 1.1 लाख करोड़ रुपये की विशेष उधारी सुविधा की थी और राज्यों को अपनी अर्थव्यवस्था के 0.5 फीसदी के बराबर उधारी बाजार से लेने की इजाजत दे दी थी।

First Published - May 23, 2021 | 11:06 PM IST

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