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केंद्र प्रायोजित योजनाओं में बढ़े उसका खर्च

Last Updated- December 11, 2022 | 10:31 PM IST

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ आज हुई बजट पूर्व बैठक में राज्यों के प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र सरकार को केंद्र प्रायोजित योजनाओं में खर्च का अपना हिस्सा बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों के लिए बिना शर्त उधारी सीमा बढ़ाने तथा समाज के कुछ वर्गों को प्रत्यक्ष आय सहायता आदि जैसे सुझाव दिए हैं।
हालांकि लगभग सभी राज्यों की मांग थी कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे को पांच साल और बढ़ाकर 2027 तक किया जाए। लेकिन यह मसला आम बजट के दायरे में नहीं आता है और इस पर जीएसटी परिषद में चर्चा की जा सकती है, जिसकी बैठक शुक्रवार को होगी।
राजस्थान के तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग ने बताया, ‘हमारी महत्वपूर्ण मांग है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाए क्योंकि इसमें केंद्र की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम हो रही है और राज्यों का हिस्सा बढ़ गया है जबकि होना इसके उलट चाहिए। पहले कुछ योजनाओं में केंद्र का हिस्सा 90:10 था जो अब 60:40 या 50:50 हो गया है।’
पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा, ‘कई योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी ज्यादा थी लेकिन अब यह 60:40 हो गई है। कुछ योजनाओं में तो 75:25 की हिस्सेदारी बदलकर 25:75 हो गई है, जिसे ठीक करने की जरूरत है।’
केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र और राज्य पहले से तय अनुपात में पैसे लगाते हैं। इस तरह की योजनाओं में मनरेगा, आवास योजना, स्वास्थ्य एवं शिक्षा मिशन, जल जीवन मिशन आदि आते हैं। राजस्थान ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं में 100 फीसदी खर्च केंद्र को करना चाहिए। गर्ग ने कहा कि राज्यों को केवल चुनावों के समय ही नहीं बल्कि महामारी जैसे संकट के समय भी विशेष पैकेज मिलना चाहिए। पश्चिम बंगाल की मंत्री ने कहा कि केंद्र को समाज के सबसे गरीब तबके को प्रत्यक्ष आय सहायता देने पर विचार करना चाहिए और राज्यों को बिना शर्त अतिरिक्त उधारी की अनुमति मिलनी चाहिए।
तमिनलाडु के वित्त मंत्री पी त्यागराजन ने भी इस पर सहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि राज्यों को निर्धारित सीमा में बिना शर्त उधारी की अनुमति दी जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि कोविड के कारण राज्यों का राजस्व घटा है, ऐसे में 2022-23 के लिए जीएसडीपी की 5 फीसदी तक बिना शर्त उधारी की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने एमएसएमई के लिए भी समग्र वित्तीय पैकेज की मांग की। 2020 से राज्यों को बॉन्ड बाजार के जरिये उधारी लेने की अतिरिक्त सहूलियत दी गई है। लेकिन इसके लिए कई शर्तें तय कर दी गई हैं। राज्य उसी सूरत में ज्यादा उधारी ले सकते हैं जब वे पूंजीगत व्यय में अच्छी प्रगति दिखाएंगे या बिजली क्षेत्र अथवा शहरी निकाय में सुधार करेंगे। जीएसटी मुआवजे की अवधि बढ़ाने की मांग सभी राज्यों ने की है, जिनमें भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य भी शामिल हैं।

First Published - December 30, 2021 | 11:07 PM IST

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