भारत के विदेशी सौदों में बढ़ोतरी

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 4:17 PM IST

भारत विदेश में विलय एवं अधिग्रहण पर इस साल अगस्त तक इतनी रकम खर्च कर चुका है, जितनी पिछले पूरे साल में नहीं हुई थी। ट्रैकर रीफिनिटिव के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल विदेशी विलय एवं अधिग्रहण 7.6 अरब डॉलर के हुए हैं, जो सौदों के मूल्य में लगातार तीसरे साल बढ़ोतरी दर्शाते हैं। रीफिनिटिव लंदन स्टॉक एक्सचेंज समूह का हिस्सा है, जो वैश्विक स्तर पर होने वाले ऐसे सौदों पर नजर रखती है।
सरकार ने विदेशी निवेश आसान बनाने के लिए इसी 22 अगस्त को एक बयान में कहा, ‘ वैश्विक बाजार तेजी से एकीकृत हो रहा है। ऐसे में भारत के उद्यमों की नई जरूरतों को मद्देनजर रखते हुए भारतीय कंपनियों का वैश्विक मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनना आवश्यक है। विदेशी निवेश के लिए संशोधित नियामकीय ढांचे से सब आसान हो गया है…विदेशी निवेश से संबंधित लेनदेन पहले मंजूरी की व्यवस्था के तहत आते थे, वे अब स्वतः व्यवस्था के तहत आ गए हैं।’

आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2021 में 7.4 अरब डॉलर, वर्ष 2020 में 4.4 अरब डॉलर और 2019 में 2.8 अरब डॉलर के सौदे हुए थे। वर्ष 2018 में 12.8 अरब डॉलर के विदेशी सौदे हुए थे मगर यह आंकड़ा भी 2010 में 29.1 अरब डॉलर के सौदों की तुलना में कम था। आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी सौदों में सबसे अधिक हिस्सेदारी स्वास्थ्य की रही। इस क्षेत्र में 3.5 अरब डॉलर के 17 सौदे हुए। उद्योग क्षेत्र 1.5 अरब डॉलर के 13 सौदों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उच्च तकनीक क्षेत्र में 1.4 अरब डॉलर के 43 सौदे हुए। 
 

रीफिनिटिव के आंकड़ों के मुताबिक स्वास्थ्य क्षेत्र के सौदों में बड़ी हिस्सेदारी बायोकॉन द्वारा अमेरिकी कंपनी वियट्रिस के 3.3 अरब डॉलर में अधिग्रहण की रही। अदाणी समूह ने इजरायल के गाडोट बिज़नेस ग्रुप के साथ मिलकर वहां के हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण 1.2 अरब डॉलर में किया था, जो दूसरा सबसे बड़ा विदेशी सौदा रहा। 
 

वर्ष 2021 में सबसे ज्यादा विदेशी सौदे उच्च तकनीक कंपनियों के रहे। पिछले साल 24 अगस्त तक 2.6 अरब डॉलर के 36 सौदे हो चुके थे। पूरे साल में हाईटेक कंपनियों के अधिग्रहण के 3.6 अरब डॉलर के 73 सौदे हुए। वर्ष 2010 के सौदौं में दूरसंचार का अहम योगदान रहा, जिसमें 11.2 अरब डॉलर के सौदे हुए थे। 

इस साल सबसे ज्यादा विदेशी सौदे ब्रिटेन के बजाय अमेरिकी कंपनियों के साथ हुए। अब तक कुल सौदों में अमेरिका का हिस्सा 53.5 फीसदी रहा है। पिछले साल इस समय तक मूल्य के लिहाज से सौदों में ब्रिटेन की हिस्सेदारी 44.6 फीसदी थी। अमेरिका की हिस्सेदारी 2019 में महामारी से पहले के स्तर 42.5 फीसदी से भी अधिक है। मगर ब्रिटेन अब भी भारतीय उद्यमों का सबसे बड़ा खरीदार है। इसने 2022 में 2.2 अरब डॉलर के 38 सौदे किए हैं। इसके बाद कनाडा (2.1 अरब डॉलर के 22 सौदे) और सिंगापुर (1.8 अरब डॉलर के 47 सौदे) का स्थान रहा। 2021 में भारतीय उद्यमों के विलय एवं अधिग्रहण में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सिंगापुर की रही। इसने 6.2 अरब डॉलर के 63 सौदे किए थे। 
 

देश में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। भारतीय रिजर्व  बैंक के मासिक आंकड़े से पता चलता है कि 2021 में भारत में कुल शुद्ध प्रत्यक्ष विदेश निवेश 27.5 अरब डॉलर रहा। यह वर्ष 2020 में 53.2 अरब डॉलर रहा था। 

First Published : August 25, 2022 | 9:39 PM IST