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आर्थिक संकेतकों में सुधार

Last Updated- December 14, 2022 | 11:50 PM IST

कई साप्ताहिक आर्थिक संकेतकों में 2019 के मुकाबले अधिक स्तर के आंकड़े दर्ज किए गए हैं जिससे अर्थव्यवस्था में सक्रियता बढऩे के संकेत दिख रहे हैं। दुनिया भर के विश्लेषकों को व्यावहारिक स्थिति के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त करने के लिए और ज्यादा मौजूदा संकेतकों की उम्मीद है, क्योंकि बहुत-से देशों में लॉकडाउन लागू किया गया है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) जैसे कई व्यापक आर्थिक संकेतक कुछ अंतराल के बाद जारी किए जाते हैं।
बिज़नेस स्टैंडर्ड साप्ताहिक आधार पर उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों पर नजर रख रहा है। इसमें प्रमुख शहरों में यातायात की भीड़भाड़, उत्सर्जन का स्तर और बिजली उत्पादन शामिल हैं। सभी आंकड़े रविवार, 27 सितंबर तक के हैं। इनमें गूगल के आवागमन के आंकड़े भी शामिल रहते हैं। हालांकि इन्हें कुछ समय के अंतराल के बाद जारी किया जाता है। गूगल के नवीनतम आंकड़े 21 सितंबर तक के हैं। बिजली उत्पादन के आंकड़े वर्ष 2019 की इसी अवधि की तुलना में करीब पांच प्रतिशत अधिक हैं। वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिए मार्च के आखिर से शुरू किए गए लॉकडाउन के शीर्ष स्तर के दौरान इनमें तकरीबन 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई थी। ये आंकड़े वर्ष 2019 की तुलना में सितंबर माह के दौरान अधिकांशत: अधिक रहे हैं।
पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में भारतीय रेलवे ने रविवार को समाप्त होने वाले सातों दिनों के दौरान अधिक मात्रा में माल ढुलाई की है। माल परिवहन से होने वाली आय भी पिछले साल के मुकाबले अधिक रही है। माल ढुलाई के नवीनतम आंकड़ों में वर्ष 2019 की तुलना में लगातार इजाफा हुआ है। इस सप्ताह के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि पहले की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक माल ढुलाई की गई है।
दिग्गज सर्च इंजन गूगल आवागमन के आंकड़े एकत्र करता है। इसका उपयोग कार्यस्थलों समेत विभिन्न श्रेणियों वाले स्थानों की यात्रा का परिदृश्य तैयार करने के लिए किया जाता है। कार्यस्थल की यात्रा सामान्य स्थिति के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत स्तर पर है। गूगल की कार्यपद्धति में बदलाव की वजह से कुछ अन्य श्रेणियों के आंकड़े पिछली अवधि के हैं। घर पर समय बिताने का प्रचलन भी बढ़ रहा है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन पर निगाह रखता है। औद्योगिक गतिविधि और वाहनों से यह गैस निकलती है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले साल के मुकाबले उत्सर्जन में लगातार गिरावट का स्तर बना हुआ है। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले नवीनतम स्तर 93 प्रतिशत नीचे है। दिल्ली में अलग प्रवृत्ति दिखती है। यहां नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर वर्ष 2019 के स्तर से अधिक हो गया है। यह अब वर्ष 2019 की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है।
स्थिति की जानकारी देने वाली वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी टॉमटॉम इंटरनैशनल के यातायात संबंधी आंकड़े भी बताते हैं कि इन दोनों शहरों की गतिविधि में अंतर है। मुंबई का यातायात पिछले साल के आंकड़ों की तुलना में 33 प्रतिशत कम है, जबकि नई दिल्ली का यातायात वर्ष 2019 के मुकाबले केवल 27 प्रतिशत ही कम है। हाल के समय में दोनों शहरों में सुधार का रुख दिखाई दे रहा है।

First Published - September 28, 2020 | 11:02 PM IST

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