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2 किस्त में ब्याज का भुगतान करेगा ईपीएफओ

Last Updated- December 15, 2022 | 2:21 AM IST

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने आज फैसला किया है कि 2019-20 के लिए वह औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों को ब्याज का भुगतान किस्तों में करेगा। संगठन को यह फैसला कोविड-19 महामारी के कारण आमदनी में आई कमी की वजह से करना पड़ा है।
ईपीएफओ अपने उपभोक्ताओं को वित्त वर्ष 2019-20 में 8.15 प्रतिशत ब्याज देगा, जो मार्च में 8.5 प्रतिशत ब्याज देने के फैसले से कम है। बुधवार को श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टी (सीबीटी) की बैठक में शामिल रहे एक सदसस्य ने कहा कि अगर ईपीएफओ अपने इक्विटी निवेश भुनाने में सफल रहता है तो शेष 0.35 प्रतिशत ब्याज का भुगतान दिसंबर में किया जाएगा।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘कोविड-19 के कारण पैदा हुई असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए सेंट्रल बोर्ड ने ब्याज दर के एजेंडे पर विचार किया और उसने सिफारिश की है कि 8.50 प्रतिशत की दरें बरकरार रहेंगी। इसमें डेट इनकम का 8.15 प्रतिशत और शेष 0.35 प्रतिशत (पूंजीगत लाभ) होगा, जो ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों) की बिक्री से आएगा और उसी के मुताबिक इसका भुगतान 31 दिसंबर 2020 तक हो सकता है।’ एक सदस्य ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि अगर ईपीएफओ अपने उपभोक्ताओं को 2019-20 में एकमुश्त  8.5 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करता है तो उसकी आमदनी में मोटे तौर पर 2,500 करोड़ रुपये की कमी आएगी। अगर ईपीएफओ इस साल दिसंबर में शेष 0.35 प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान करने में सक्षम नहीं होता है तो यह 1977-78 के बाद फंड उपभोक्ताओं को सबसे कम मुनाफा होगा। 1977-78 में ईपीएफओ ने 8 प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान किया था। ईपीएफओ अपने करीब 19 करोड़ खाताधारकों को ब्याज देता है।
ईपीएफओ पर 8.5 प्रतिशत ब्याज दर पहले ही 7 साल का निचला स्तर है और इसके पहले के वित्त वर्ष में संगठन ने 8.65 प्रतिशत ब्याज का भुगतान किया था। माना जा रहा है कि ईपीएफओ 2016 में किए गए ईटीएफ यूनिट इन्वेस्टमेंट को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भुनाएगा। इससे ईपीएफओ को करीब 2,800 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। सीबीटी के एक सदस्य ने कहा, ‘रिटर्न की सही राशि का निर्धारण दिसंबर में ही हो पाएगा, जब ईटीएफ यूनिट्स को बेचे जाने की योजना है।’
आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सुकुमार दामले ने कहा कि धीरे धीरे करके ब्याज दरों के भुगतान संबंधी एजेंडे के बारे में सदस्यों को पहले नहीं बताया गया था। दामले ने कहा, ‘इस एजेंडे को चर्चा के अंतिम क्षणों में पेश किया गया। कर्मचारियों के प्रतिनिधि यह जानकर आश्चर्यचकित थे कि ब्याज दरों का भुगतान किस्तों में करने का फैसला किया गया है।’
सीबीटी की बैठक में पेश आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ईपीएफओ द्वारा शेयर बाजार में किए गए निवेश पर 2019-20 में घाटा हुआ है। इस वित्त वर्ष में किए गए निवेश पर 8.3 प्रतिशत का घाटा हुआ है, जबकि इसके पहले वित्त वर्ष में 14.7 प्रतिशत मुनाफा हुआ था। मार्च में कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुई स्थितियों के बीच करीब सभी निवेशकों का इक्विटी रिटर्न खत्म हो गया।
2019-20 में ईपीएफओ ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में 31,501 करोड़ रुपये निवेश किए थे, जबकि इसके पहले के वित्त वर्ष में 27,974 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। ईपीएफओ को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर भी कम मुनाफा मिला है। वित्त मंत्रालय की ओर से मंजूरी मिलने के बाद श्रम मंत्रालय ब्याज दर अधिसूचित करेगा।  ईपीएफओ के पहले के अनुमानों में दिखाया गया था कि अगर वह 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करता है तो उसके पास 700 करोड़ रुपये के करीब बचेंगे।

First Published - September 9, 2020 | 11:45 PM IST

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