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प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट

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Last Updated- December 14, 2022 | 11:26 PM IST

पिछले चार महीने की मंदी के बाद, प्रमुख क्षेत्र के उत्पादन में अगस्त में फिर से दबाव दर्ज किया गया। उत्पादन 8.5 प्रतिशत तक घटा, जबकि जुलाई में इसमें 8 प्रतिशत की गिरावट आई थी, क्योंकि मांग में कमी और नकदी संकट से कई उद्योग प्रभावित हुए।
दबाव की रफ्तार अप्रैल से घटी है। अप्रैल में उत्पादन में 38 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों कहा गया है कि आठ प्रमुख क्षेत्रों में से सात ने लगातार अगस्त में गिरावट दर्ज की, जो इस संदर्भ (उत्पादन में कमी) में लगातार छठा महीना रहा।
सबसे ज्यादा गिरावट रिफाइनरी उत्पादन में दर्ज की गई, क्योंकि कच्चे तेल का आयात 41 प्रतिशत तक घट गया। यह क्षेत्र पूरे वित्त वर्ष 2020 और चालू वर्ष में अस्थिर बना रहा। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक मांग में अचानक कमी आई, क्योंकि कोविड-19 महामारी से हर जगह आर्थिक गतिविधि प्रभावित हुई जिससे इस क्षेत्र में दबाव बढ़ गया। जुलाई में 14 प्रतिशत तक की गिरावट के बाद, अगस्त में कुल उत्पादन में 19 प्रतिशत तक की कमी आई। रिफाइनरी उत्पादन का आठ प्रमुख क्षेत्रों में सबसे ज्यादा भारांक है और विश्लेषकों को आने वाले महीनों में कुल उत्पादन के आंकड़ों में नरमी आने की आशंका है।
वहीं कच्चा तेल उत्पादन लगातार 23वें महीने घटा है। यह उत्पादन अगस्त में 6.3 प्रतिशत घटा, जो पूर्ववर्ती महीने में दर्ज की गई 4.3 प्रतिशत की गिरावट से ज्यादा है। हालांकि, कोयला उत्पादन सकारात्मक रहा और जुलाई में 5.7 प्रतिशत की कमी के बाद अगस्त में इसमें 3.6 प्रतिशत तक की वृद्घि दर्ज की गई, क्योंकि कोयला उठाव का स्तर मजबूती से बढ़ा है।
विद्युत उत्पादन में भी कमजोरी आई है, हालांकि यह गिरावट काफी कम है। विद्युत उत्पादन में सालाना आधार गिरावट अस्त में 2.5 प्रतिशत रही, जो जुलाई में 2.3 प्रतिशत थी। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिती नायर ने कहा, ‘पनबिजली उत्पादन जुलाई में 13.6 प्रतिशत की वृद्घि के मुकाबले अगस्त में 2.9 प्रतिशत घट गया, जबकि ताप विद्युत निर्माण में गिरावट जुलाई के 2.2 प्रतिशत से मामूली बढ़कर 2.4 प्रतिशत दर्ज की गई।’
कुल मिलाकर, अगस्त-दिसंबर 2019 से विद्युत उत्पादन में गिरावट के साथ यह क्षेत्र अगले कुछ महीनों में शेष अर्थव्यवस्था को मात दे सकता है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट को भी लगातार बड़े उत्पादन झटकों का सामना करना पड़ा है। इस्पात और सीमेंट जैसे पहले से ही अस्थिर क्षेत्रों पर कोविड-19 महामारी का व्यापक प्रभाव पड़ा, क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग मानकों की वजह से पूरे देश में निर्माण गतिविधि काफी हद तक ठप हो गई। इस्पात उत्पादन में गिरावट 6.3 प्रतिशत पर रही, जो पूर्ववर्ती महीने में 8.3 प्रतिशत थी।
दूसरी तरफ, सीमेंट उत्पादन में गिरावट का आंकड़ा अगस्त में फिर से बढ़कर 14.6 प्रतिशत पर पहुंच गया।
उर्वरक क्षेत्र ऐसा क्षेत्र रहा जिसने उत्पादन में वृद्घि दर्ज की। उर्वरक उत्पादन जहां जुलाई में 6.9 प्रतिशत बढ़ा, वहीं अगस्त में यह आंकड़ा 7.3 प्रतिशत रहा।
प्रमुख क्षेत्रों की वृद्घि और औद्योगिक उत्पादन वृद्घि के सूचकांक (आईआईपी) के बीच संबंध को देखते हुए आईआईपी जुलाई के 10.4 प्रतिशत से कमजोर पड़कर अगस्त में 6-8 प्रतिशत दर्ज किए जाने का अनुमान है।

राजकोषीय घाटा अगस्त में भी अनुमान से ऊपर
केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा अगस्त माह के अंत में लगातार दूसरे महीने वार्षिक अनुमान से ऊपर रहा है। सरकार की राजस्व प्राप्ति पर लॉकडाउन का प्रभाव होना इसकी मुख्य वजह रहा है। महा लेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त की अवधि में सरकार का राजकोषीय घाटा इस साल के बजट में पूरे साल के लिये तय राजकोषीय घाटे के अनुमान का 109.3 प्रतिशत रहा है। वास्तविक आंकड़ों में यदि बात की जाए तो यह अगस्त के अंत में 8,70,347 करोड़ रुपये रहा है। वहीं एक साल पहले इसी अवधि में यह सालाना बजट अनुमान का 78.7 प्रतिशत रहा था। राजकोषीय घाटा जुलाई में भी इसके लिए रखे गए वार्षिक अनुमान से ऊपर निकल गया था। सरकार की कुल प्राप्ति और व्यय के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल फरवरी में पेश वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में राजकोषीय घाटे के देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 प्रतिशत यानी 7.96 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है। भाषा

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First Published - September 30, 2020 | 11:23 PM IST

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