facebookmetapixel
Advertisement
सैलरीड होकर 20-30% टैक्स दे रहे हैं आप, अमीर कैसे बचा लेते हैं ज्यादा पैसा? एक्सपर्ट ने खोला राजसिर्फ क्लाइमेट चेंज नहीं, अब ‘जियोपॉलिटिक्स’ बढ़ाएगी भारत में क्लीन एनर्जी की रफ्तार: BS ‘मंथन’ में बोले सुमंत सिन्हाBS Mantha 2026: EVs स्टार्टअप्स क्यों रह गए PLI से बाहर?BS Manthan में बोले एक्सपर्ट्स: बढ़ती AI पावर यूज के बीच ग्रीन डेटा सेंटर पॉलिसी जरूरीBS Manthan में बोले एक्सपर्ट्स: टेक्नोलॉजी, मटेरियल और सप्लाई चेन से मजबूत होगा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर‘AI अपनाओ, भले कमाई क्यों न घट जाए’, TCS ने अपने कर्मचारियों से कहा: इससे घबराने की जरूरत नहींNPS वात्सल्य में बड़ा बदलाव: अब 100% इक्विटी निवेश की छूट, बच्चों के लिए बनेगा भारी फंडखेती में हर साल हो सकती है ₹40000 करोड़ तक की बचत, बीएस मंथन में कृषि विशेषज्ञों ने बताए समाधान₹11 प्रति यूनिट से ₹2.50 पर आई सौर बिजली, प्रह्लाद जोशी बोले- सस्ती ऊर्जा से घटेगी उद्योगों की लागतBS Manthan 2026: क्या भारत बनेगा दुनिया की फूड फैक्ट्री? एक्सपर्ट्स ने बताया इसके लिए क्या करना होगा

Core sector growth: मुख्य उद्योग क्षेत्र की वृद्धि दिसंबर में 14 माह के निचले स्तर पर पहुंची

Advertisement

नवंबर 2023 की तुलना में दिसंबर 2023 में सिर्फ उर्वरक (5.8 फीसदी) और सीमेंट (1.3 फीसदी) क्षेत्र के उत्पादन में ही तेजी दर्ज की गई।

Last Updated- January 31, 2024 | 10:11 PM IST
Core Sector Growth

दिसंबर 2023 में मुख्य उद्योग क्षेत्र (कोर सेक्टर) यानी आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की वृद्धि धीमी होकर 14 महीने के निचले स्तर 3.8 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले महीने यानी नवंबर में यह 7.9 फीसदी थी। साल 2022 के दिसंबर में मुख्य उद्योग क्षेत्र ने 8.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़े के अनुसार, नवंबर 2023 की तुलना में दिसंबर 2023 में सिर्फ उर्वरक (5.8 फीसदी) और सीमेंट (1.3 फीसदी) क्षेत्र के उत्पादन में ही तेजी दर्ज की गई। इस दौरान, कोयला (10.6 फीसदी), प्राकृतिक गैस (6.6 फीसदी), रिफाइनरी उत्पाद (2.6 फीसदी), स्टील (5.9 फीसदी) और बिजली (0.6 फीसदी) क्षेत्र के उत्पादन में वृदि्ध घटी है।

वहीं दूसरी ओर दिसंबर में कच्चे तेल का उत्पादन लगातार दूसरे महीने सिकुड़ा रहा और इसमें 1 फीसदी की गिरावट आई।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि बेशक उच्च आधार का प्रभाव था मगर मुख्य उद्योग क्षेत्र में भी मंदी थी क्योंकि पूंजीगत व्यय पर सरकारी खर्च स्थिर था, हालांकि निजी क्षेत्र में ऐसा नहीं देखा गया था।

उन्होंने कहा, ‘सर्दियों के कारण बिजली की अधिक मांग की तैयारी में अधिक खनन करने से कोयला क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, बिजली क्षेत्र की गति धीमी हो गई, जो कम औद्योगिक गतिविधि को दर्शाती है। उर्वरकों की वृद्धि स्थिर रही, जो मांग के अनुरूप बनी रही।

Advertisement
First Published - January 31, 2024 | 10:11 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement