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सिर्फ क्लाइमेट चेंज नहीं, अब ‘जियोपॉलिटिक्स’ बढ़ाएगी भारत में क्लीन एनर्जी की रफ्तार: BS ‘मंथन’ में बोले सुमंत सिन्हा

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सिन्हा ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बदलाव अब निर्णायक दौर में है; टेक्नोलॉजी, सस्ती क्लीन एनर्जी और भारत की तेज इलेक्ट्रिफिकेशन के दम पर इलेक्ट्रो स्टेट्स भविष्य की दौड़ जीतेंगे

Last Updated- February 25, 2026 | 5:08 PM IST
Sumant Sinha
रिन्यू पावर के फाउंडर, चेयरमैन और CEO सुमंत सिन्हा बिज़नेस स्टैडंर्ड 'मंथन' में अपनी बात रखते हुए

रिन्यू पावर के फाउंडर, चेयरमैन और CEO सुमंत सिन्हा ने कहा कि दुनिया में एनर्जी का बदलाव अब ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है, जहां इसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो गया है। सिन्हा ने बिजनेस स्टैंडर्ड के मंथन समिट के दूसरे दिन यह बात कही। उनका कहना है कि भले ही दुनिया में राजनीतिक तनाव और आर्थिक उथल-पुथल मची हो, लेकिन यह ट्रांजिशन अब पटरी से उतरने वाला नहीं है।

पहले सिर्फ क्लाइमेट चेंज, अब कई वजहें

सिन्हा ने बताया कि शुरुआत में क्लाइमेट चेंज ने इस बदलाव को शुरू किया था। लेकिन अब इसमें एनर्जी सिक्योरिटी, सस्ती बिजली और जियोपॉलिटिक्स जैसी कई वजहें जुड़ गई हैं। उन्होंने कहा, “क्लाइमेट चेंज ने सफर शुरू किया, लेकिन अब ये सारी चीजें मिलकर इसे तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।”

दुनिया दो खेमों में बंट गई

उन्होंने दुनिया को पेट्रो स्टेट्स और इलेक्ट्रो स्टेट्स जैसे दो बड़े ग्रुप में बांटा। पेट्रो स्टेट्स वो देश हैं जिनके पास तेल और गैस के खूब भंडार हैं। इसमें अमेरिका भी शामिल है, जो अब शेल गैस का बड़ा उत्पादक बन चुका है और ज्यादातर फ्रैकिंग से निकालता है।

दूसरी तरफ इलेक्ट्रो स्टेट्स वो हैं जिनके पास फॉसिल फ्यूल कम हैं। इसलिए वे बिजली पर ज्यादा जोर दे रहे हैं ताकि बाहर से एनर्जी खरीदने की जरूरत कम हो। सिन्हा ने कहा कि चीन पहले ही इलेक्ट्रो स्टेट बन चुका है और भारत भी तेजी से उसी दिशा में बढ़ रहा है।

जब उनसे पूछा गया कि इनमें से कौन मजबूत रहेगा, तो उन्होंने साफ कहा कि इलेक्ट्रो स्टेट्स आखिरकार जीतेंगे। वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि इनके पास टेक्नोलॉजी है। पेट्रो स्टेट्स तो बस जमीन से तेल निकाल रहे हैं, लेकिन रिजर्व कम होते जाने से निकालना मुश्किल और महंगा होता जाएगा।

Also Read: ₹11 प्रति यूनिट से ₹2.50 पर आई सौर बिजली, प्रह्लाद जोशी बोले- सस्ती ऊर्जा से घटेगी उद्योगों की लागत

टेक्नोलॉजी से क्लीन एनर्जी सस्ती हो रही

सिन्हा ने बताया कि क्लीन एनर्जी में टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। बैटरी की कीमतें महज डेढ़ साल पहले के मुकाबले अब एक तिहाई रह गई हैं। सोलर की कीमतें भी बहुत गिर चुकी हैं और ज्यादातर जगहों पर सोलर अब नई बिजली बनाने का सबसे सस्ता तरीका है। विंड एनर्जी की लागत भी बहुत कम हो गई है।

कई इंडस्ट्रीज अब फॉसिल फ्यूल छोड़कर बिजली की तरफ जा रही हैं। भारत में डेटा सेंटर्स इसका अच्छा उदाहरण हैं। ये अब रिन्यूएबल एनर्जी पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं क्योंकि उनके GPU क्लस्टर्स बहुत ज्यादा पावर खींचते हैं। सिन्हा ने कहा कि डेटा सेंटर्स रिन्यूएबल एनर्जी के लिए बहुत बड़ा मौका हैं।

उन्होंने अनुमान लगाया कि 10 से 15 साल बाद साफ दिखेगा कि इलेक्ट्रो स्टेट्स ने बाजी मार ली है।

भारत तेजी से और साफ रास्ते पर

भारत के बारे में सिन्हा ने कहा कि देश पहले से ही बहुत तेजी से इलेक्ट्रिफाई हो रहा है और वो भी कम प्रति व्यक्ति आय पर। साथ ही यह क्लीन एनर्जी के साथ हो रहा है। नीति आयोग के नेट जीरो 2070 के रोडमैप के अनुसार आज भारत की कुल एनर्जी में बिजली का हिस्सा 20 फीसदी है। 2050 तक यह 40 फीसदी और 2070 तक 60 फीसदी हो जाएगा।

इसमें से 2070 तक 85 फीसदी बिजली रिन्यूएबल सोर्स से आएगी। इसके लिए अभी की 140 गीगावॉट रिन्यूएबल कैपेसिटी को 2050 तक 3,000 गीगावॉट और 2070 तक 6,000 गीगावॉट तक ले जाना होगा। सिन्हा ने इसे बहुत बड़ा अवसर और चुनौती दोनों बताया।

रिन्यू कंपनी के नए कदम

सिन्हा ने रिन्यू के प्लान्स के बारे में बताया कि कंपनी अब सिर्फ विंड, सोलर और बैटरी से पावर बनाने तक नहीं रुकेगी। अब वे सोलर पैनल और सेल्स बनाना शुरू कर रहे हैं। आगे वे पीछे की तरफ इंटीग्रेशन करेंगे – वेफर्स, इंगॉट्स और शायद पॉलीसिलिकॉन तक पहुंचने की योजना है।

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First Published - February 25, 2026 | 5:06 PM IST

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