जोमैटो की सख्त खाद्य नीति 3 मई तक टली

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:51 PM IST

अपने प्लेटफॉर्म से बिकने वाले खाने की गुणवत्ता के बारे में बनाई गई सख्त नीति पर रेस्तरां के तेवर बिगड़ते देखकर जोमैटो ने इसे लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। पहले यह नीति 18 अप्रैल से लागू होनी थी मगर अब इसे एक पखवाड़े आगे बढ़ाकर 3 मई कर दिया गया है। इस नीति के मुताबिक भोजन की गुणवत्ता के बारे में ग्राहकों की शिकायत आने पर रेस्तरां को कुछ समय के लिए जोमैटो के प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है।
इस नीति के बारे में जोमैटो ने रेस्तरां को पत्र भेजा था, जिस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आई थीं। इसे देखकर कंपनी ने रेस्तरां से इस नीति पर 22 अप्रैल तक प्रतिक्रिया देने को भी कहा है। कंपनी ने कहा कि इस नीति से जुड़े मामले बहुत दुर्लभ (0.001 फीसदी) होते हैं। लेकिन उसने कहा, ‘ऐसे दुर्लभ मामलों में भी अगर कार्रवाई नहीं की गई तो ग्राहकों के भरोसे को ठेस पहुंचेगी और आगे जाकर रेस्तरां का नाम भी खराब होगा।’
कंपनी ने कहा कि शिकायत सही है, यह तय करने के लिए वह रेस्तरां के साथ काम करेगी। उसके बाद अगर नियत समय में उचित समाधान नहीं दिया जाता तो रेस्तरां को कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है। कंपनी ने रेस्तरां को आज भेजे ई-मेल में कहा, ‘प्लेटफॉर्म से हटाने का काम रेस्तरां प्रबंधन से बात करने के बाद ही किया जाएगा और तब तक निलंबित रखा जाएगा, जब तक समस्या सुधारने के लिए उपाय नहीं किए जाते और उन उपायों को एफएसएसएआई से प्रमाणित स्वच्छता एवं सुरक्षा ऑडिटर सत्यापित नहीं कर देता।’ यह ई-मेल बिज़नेस स्टैंडर्ड ने देखा है। इसमें कहा गया है कि जांच पर आने वाला खर्च भी उस रेस्तरां को ही उठाना पड़ेगा।
रेस्तरां इसका विरोध करते हुए कह रहे थे कि जोमैटो की नई नीति एकतरफा है और इससे उन्हें नुकसान उठाना होगा। नैशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के अध्यक्ष कबीर सूरी जोमैटो के संस्थापक मोहित गुप्ता से बात कर चुके हैं और इस विवाद का हल निकालने के लिए अगले हफ्ते उनकी बैठक होने वाली है। इस बैठक में सभी पक्षों की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा। इस बीच एनआरएआई जोमैटो को पत्र भी लिख रहा है, जिसमें वह अपनी चिंताएं सामने रखेगा। समझा जा रहा है कि जोमैटो को शनिवार तक यह पत्र मिल जाएगा।
जोमैटो के इस नए कायदे पर एनआरएआई के मुंबई चैप्टर के प्रमुख प्रणव रूंगटा कहते हैं, ‘नीति का मकसद तो अच्छा है मगर जोमैटो जिस रूप में इसे लागू करना चाहती है वह चिंता का विषय है। इस नए कायदे से छोटे रेस्तरां को नुकसान पहुंच सकता हैं और जोमैटो पर उपलब्ध स्मॉल क्लाउड किचन (केवल ऑनलाइन ऑर्डर लेकर खाना भेजने वाले रेस्तरां) का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा।’
एनआरएआई के मुंबई चैप्टर के प्रमुख प्रणव रूंगटा ने कहा कि जोमैटो यह प्रमााणित कैसे कर पाएगी कि ग्राहकों की शिकायत वाजिब है। उन्होंने कहा, ‘ग्राहक सेवा केंद्र में बैठे प्रतिनिधि ग्राहकों द्वारा साझा की गई भोजन की तस्वीर देखकर कैसे किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाएंगे।’ रूंगटा ने कहा, ‘हम रेस्तरांओं में खाना पैक होने तक इसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी ले सकते हैं मगर उसके बाद हमारी जवाबदेही खत्म हो जाती है क्योंकि खाना पहुंचाने वाले एजेंट खाने में मिलावट कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि विवाद के समाधान के लिए पहले से ही व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत ग्राहक खानपान की गुणवत्ता के संबंध में एफएसएसएआई के पास शिकायत दर्ज करा सकता है। रूंगटा ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से ग्राहकों तक भोजन पहुंचाने वाली किसी कंपनी को गुणवत्ता जांचने का अधिकार नहीं है। क्विक सर्विस रेस्तरां ब्रांड सामोसा पार्टी के अनुसार कई बार ऐसे मौके भी आए हैं, जब किसी एक रेस्तरां ने अपने प्रतिस्पद्र्धी रेस्तरां का नाम खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर भोजन की गुणवत्ता के बारे में शिकायत दर्ज कराई है और फर्जी समीक्षा भी लिखवाई है।समोसा पार्टी कीसह-संस्थापक दीक्षा पांडेय ने कहा, ‘हम लोगों को समझाने की कोशिश करते रहे हैं कि यह सोचना ठीक नहीं है कि छोटे रेस्तरांओं का भोजन स्वाद के मामले में अव्वल होता है। मगर इसका यह मतलब नहीं है कि एक दूसरे का कारोबार खराब कर ऐसा किया जाए।’
उन्होंने कहा, ‘जोमैटो की नीति काफी एकतरफा लग रही है। इसमें एक तरफ की बात को तो तवज्जो दी जाएगी मगर दूसरे पक्ष की दलील नहीं मानी जाएगी। जब रेस्तरांओं की गलती नहीं हो तो उन्हें दंडित किए जाने का कोई औचित्य नहीं है।’वर्ष 2018 में जोमैटो और स्विगी ने करीब 10,000 से अधिक रेस्तरांओं को अपने मंचों से हटा दिया था। 

First Published : April 15, 2022 | 11:22 PM IST