केकेआर के निवेश वाली कंपनी वाइरसेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भारत के पहले बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) की स्थापना की है। यह एक निजी इनविट होगा जिसके लिए केकेआर की इकाई ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से मंजूरी मांगी है।
कंपनी गुजरात के पाटन, राजस्थान के जोधपुर और उत्तर प्रदेश के मोहबा सहित विभिन्न जगहों पर करीब 76 एमडब्ल्यूपी (मेगावॉट-पीक) क्षमता की परिचालन वाली सौर संपत्ति का एक पोर्टफोलियो तैयार करने की प्रक्रिया में है। इन परिसंपत्तियों के लिए सरकारी बिजली खरीद कंपनियों के साथ बिजली खरीद समझौते (पीपीए) हो चुके हैं। इन परिसंपत्ति को इस इनविट में शामिल किया जाएगा। इस इनविट का लक्ष्य अगले दो-तीन वर्षों में लगभग 1.5 गीगावॉट क्षमता की परिसंपत्ति तैयार करना है।
क्रिसिल ने वाइरसेंट रिन्यूएबल एनर्जी ट्रस्ट (वीआरईटी) को बैंक ऋण सुविधाओं के लिए एएए/स्थिर अनंतिम रेटिंग दी है। एएए/स्थिर रेटिंग क्रिसिल द्वारा दी जाने वाली सर्वोच्च अनंतिम रेटिंग है। अच्छी रेटिंग मिलने का एक प्रमुख कारण पूर्व-निर्धारित शुल्क दर पर लंबी अवधि के पीपीए के कारण राजस्व की दमदार क्षमता है। कंपनी ने कहा कि अधिक उत्पादन क्षमता का ट्रैक रिकॉर्ड, स्वस्थ वित्तीय जोखिम प्रोफाइल और संभावित कम ऋण बोझ वाले प्रोफाइल के कारण भी अच्छी रेटिंग दी गई है।
वाइरसेंट के कम ऋण बोझ के कारण उसका ऋण-दायित्व कवरेज अनुपात पूरी अवधि के लिए दमदार है और इसे पर्याप्त नकदी प्रवाह से भी मदद मिल रही है। वीआरईटी के शुरुआती पोर्टफोलियो में नौ सौर ऊर्जा परियोजनाएं शामिल होंगी जिनकी कुल क्षमता लगभग 400 एमडब्ल्यूपी होगी। ये परिसंपत्तियां महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में हैं। यह पोर्टफोलियो काफी हद तक सौर ऊर्जा परिसंपत्तियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसमें 80 से 90 फीसदी सौर ऊर्जा परिसंपत्तियां शामिल होंगी।
यूपीआर्ई ने शुरू की फंडों के लिए भुगतान सेवा
नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने बुधवार को कहा कि उसे ‘सिस्टम माइग्रेशन’ की वजह से म्युचुअल फंड (एमएफ) निवेशकों को हुई ‘अनावश्यक असुविधा’ पर खेद है।
एनपीसीआई ने कहा है कि उसने भुगतान प्रणाली में तेजी लाने के लिए एमएफ के लिए विशेष क्लियरिंग सेशन शुरू किया है। पिछले सप्ताह कई म्युचुअल फंड निवेशकों को एनपीसीआई द्वारा विकसित यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) विकल्प के जरिये भुगतान में समस्याओं का सामना करना पड़ा था।
उसने कहा है, ‘यह नियोजित माइग्रेशन गतिविधि थी और इसके दौरान हमें निपटान में विलंब जैसी कुछ शुरुआती समस्याओं से जूझना पड़ा। हमारा माइग्रेशन 1 फरवरी, 2021 से लागू नियामकीय नियमों के अनुरूप था, जिसमें एनएवी का निर्धारण म्युचुअल फंडों द्वारा कोष प्राप्त होने के बाद ही किया जा सकता है।’ बीएस संवाददाता