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टाटा समूह की फैशन और एसेसरीज कंपनी, टाइटन ने शुक्रवार को ‘बियॉन’ नाम से नया ब्रांड लॉन्च करके प्रयोगशाला में बने हीरों के बाजार में उतरने की घोषणा की है। यह ब्रांड इस महीने के आखिर में लॉन्च किया जाएगा। कंपनी ने शुक्रवार सुबह शेयर बाजारों को बताया कि 29 दिसंबर को मुंबई में पहला स्टोर खुलेगा और कंपनी की योजना है कि निकट भविष्य में मुंबई और दिल्ली में और भी स्टोर खोले जाएं।
कंपनी के बयान के अनुसार, ‘बियॉन, लैब में बने हीरों के आभूषणों की विशेष श्रृंखला पेश करते हुए इस उभरते हुए बाजार में एक नई शुरुआत करेगा।’ ब्रांड का उद्देश्य घड़ियों, परफ्यूम, साड़ियों और हैंडबैग के अलावा अन्य लाइफस्टाइल श्रेणी में महिलाओं की आभूषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना है। कंपनी ने यह भी कहा, ‘यह कदम टाइटन की उत्पाद श्रृंखला में विविधता लाने, भारत में टिकाऊ और लैब में बने लक्जरी आभूषणों में बढ़ती दिलचस्पी का फायदा उठाने की रणनीति दर्शाता है।’
रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स के अनुसार भारत में लैब ग्रोन डायमंडों के आभूषणों का बाजार अब भी छोटा है और अनुमान है कि वर्ष 2024 तक यह 30-35 करोड़ डॉलर का रहा होगा। लेकिन अगले दशक में इसमें 15 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर की संभावना है।
इस साल की शुरुआत में कंपनी ने एक नोट में कहा था, ‘जैसे-जैसे बाजार विकसित हो रहा है, बड़े रिटेलर और लक्जरी चीजों के कारोबार से जुड़ी कंपनियां लैब में बने हीरों के लिए राह बना रही हैं क्योंकि उनसे बिक्री की मात्रा बढ़ती है और साथ ही वे उपभोक्ताओं के लिए किफायती पेशकश के माध्यम के रूप में कारगर हैं।’
इस बीच, टाइटन के प्रमुख ब्रांड तनिष्क ने प्राकृतिक हीरों की बिक्री और खपत को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2024 में डी बीयर्स समूह के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
इस साल की शुरुआत में ब्रांड ने खरीदारों को स्पष्टता और पारदर्शिता देने के लिए हीरों से जुड़े तीन नए विशेष केंद्र लॉन्च किए और साथ ही एक तकनीक-समर्थित मूल्यांकन प्रणाली के जरिये ग्राहकों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित किया।
टाइटन कंपनी के ज्वैलरी विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अजय चावला ने उस समय बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया था, ‘लैब में बने हीरों के आने से बहुत भ्रम पैदा हो गया है और हम उम्मीद कर सकते हैं कि जैसृजैसे तकनीक का विकास होता जाएगा, लैब में बने हीरों की कीमतें और घटती जाएंगी। अब अधिक ग्राहक यह पूछते हैं कि हम प्राकृतिक हीरे बेच रहे हैं या प्रयोगशाला में बने हीरे और हम इसी भ्रम को दूर करना चाहते हैं।’
दिलचस्प बात यह है कि टाटा समूह का लैब में बने हीरों से यह पहला ताल्लुक नहीं है। पिछले साल, उसकी रिटेल इकाई, ट्रेंट ने वेस्टसाइड में उपलब्ध लाइफस्टाइल एसेसरीज श्रेणी में लैब में बने हीरे के आभूषणों की श्रृंखला पोम लॉन्च करके अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। कंपनी ने उस समय कहा था, ‘यह वेस्टसाइड के लिए हमारी स्पष्ट रणनीति के अनुरूप एक प्रायोगिक परीक्षण भी है।’
इस साल की शुरुआत में डेलॉयट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, लैब में बने हीरे उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं, जो प्राकृतिक हीरों से जुड़े पारंपरिक खनन से संबंधित पर्यावरणीय और नैतिक चिंताओं को दूर करते हुए अधिक किफायती विकल्प देते हैं।