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टीका निर्माण में गठजोड़ की जल्दी नहीं

Last Updated- December 15, 2022 | 4:47 AM IST

देश के वैक्सीन निर्माताओं को कोरोनावायरस संक्रमण में कारगर होने वाली अपनी एम-आरएनए वैक्सीन लाने के लिए अमेरिका की प्रमुख बायोटेक कंपनी मॉडर्ना के साथ गठजोड़ करने की कोई जल्दी नहीं है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन ज्यादातर कंपनियों से बात की थी कि वे या तो अपना खुद का टीका लाने की कोशिश में जुटी हैं या फि र वे अपने मौजूदा गठजोड़ पर ध्यान दे रही हैं। 
पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ने एजेडडी-1222 वैक्सीन कैंडिडेट के लिए एस्ट्राजेनेका-यूनिवर्सिटी ऑफ  ऑक्सफर्ड के साथ करार किया है। इस संस्थान का मानना है कि उसके पास पहले से ही एम-आरएनए का बेहतर वैक्सीन कैंडिडेट है। इस बीच दो अन्य वैक्सीन कंपनियों ने कहा कि वे इस बात पर गौर करेंगी कि मॉडर्ना वैक्सीन तीसरे चरण में जाने के बाद कैसे तैयार होती है और उन्हें भारत में इस वैक्सीन लाने के लिए गठजोड़ करने की कोई हड़बड़ी में नहीं है। हैदराबाद के इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स (आईआईएल) ने महसूस किया कि अगर प्रौद्योगिकी विनिर्माण संयंत्र के लिहाज से उपयुक्त है तो वे सहयोग पर विचार किया जा सकता है।
दरअसल, सीरम अगले महीने से एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का उत्पादन शुरू करने की तैयारी में है और इसका मकसद भारत में इस वैक्सीन कैंडिडेट का परीक्षण शुरू करना है। अगर सब ठीक रहा तो सीरम को उम्मीद है कि दिसंबर तक कोरोनावायरस का वैक्सीन बाजार के लिए तैयार हो जाएगा।
न्यू इंगलैंड जर्नल ऑफ  मेडिसिन (एनईजेएम) में अपने वैक्सीन कैंडिडेट एम-आरएनए 1273 के पहले चरण के परीक्षण के  नतीजे से जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित कराने वाली कंपनी मॉडर्ना के अलावा एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी सोमवार तक मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में अपने पहले चरण के परीक्षणों से जुड़ा विवरण प्रकाशित करा सकता है। ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन कैंडिडेट का नाम एजेडडी1222 है जो सामान्य सर्दी (एडेनोवायरस) वाले वायरस के कमजोर संस्करण का इस्तेमाल कर रहा है जिससे चिंपैंजी में संक्रमण होता है और इसमें सार्स-सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन की आनुवंशिक सामग्री होती है।
दूसरी ओर, मॉडर्ना का एमआरएनए 1273ए आरएनए का इस्तेमाल करता है जो एक रासायनिक मैसेंजर होता है जिसमें प्रोटीन बनाने के निर्देश होते हैं। जब इसका टीका मनुष्यों में लगाया जाता है तो तब यह  टीका मूल रूप से मानव कोशिकाओं को प्रोटीन बनाने का निर्देश देता है जो कोरोनावायरस की बाहरी सतह का नकल करता है। इसके बाद शरीर इसे बाहरी एजेंट के रूप में पहचानता है और इसके खिलाफ  प्रतिरक्षा से जुड़ी प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है। इस महीने के अंत में इसका तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण होगा ।
भारतीय कंपनियां भी टीका लाने के लिए अंतिम स्तर पर पहुंचने की तैयारी में जुटी हैं। भारत बायोटेक और जायडस कैडिला के दो वैक्सीन कैंडिडेट पहले से ही मानव परीक्षण कर रहे हैं।
जहां तक मॉडर्ना के साथ कोई सहयोग करने की बात है तो सीरम के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने न तो मॉडर्ना से संपर्क किया है और न ही उन्होंने हमसे संपर्क किया है। हमारे पास एक बेहतर एमआरएनए कैंडिडेट है जिसके साथ हम साझेदारी करेंगे और इसके बाद ही हम इसकी घोषणा करेंगे।’
दो और भारतीय वैक्सीन कंपनियों ने संकेत दिया था कि उन्हें मॉडर्ना वैक्सीन परीक्षणों में अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल को लेकर चिंता है। एक भारतीय बायोटेक कंपनी के प्रमुख ने कहा, ‘पहली बात यह है कि प्रायोगिक दवा की कोई इकाई नहीं थी। दूसरी बात यह कि प्रतिभागियों के परीक्षण के लिए नामांकन से पहले सीरोलॉजी या पॉलिमरेज चेन रिएक्शन द्वारा सार्स-सीओवी-2 संक्रमण के लिए जांच नहीं की गई थी। अगर कोई हल्के लक्षणों वाला व्यक्ति कोविड पॉजिटिव है तो उसके शरीर में पहले से ही कुछ ऐंटीबॉडी होगी।’
एक अन्य कंपनी ने कहा कि हालांकि एनईजेएम में प्रकाशित किए गए डेटा से पता चलता है कि मॉडर्ना का वैक्सीन कैंडिडेट अपेक्षाकृत सुरक्षित है लेकिन इसकी प्रभावकारिता को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है। एक अन्य कंपनी ने महसूस किया कि मॉडर्ना वैक्सीन की खुराक काफी अधिक है।
ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका का क्लीनिकल परीक्षण खत्म होने से पहले ही भारत के सीरम ने कुछ लाख खुराक बनाना शुरू कर दिया है। अभी परीक्षण तीसरे चरण में हैं। सीरम को मार्केटिंग की मंजूरी मिलने से पहले भारत में स्थानीय आबादी पर इसका परीक्षण करना होगा। एसआईआई के मुख्य कार्यकारी अडार पूनावाला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया था, ‘ऑक्सफ र्ड टीके भारत में बनाए और पैक किए जाएंगे। हम इसके लिए 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च कर रहे हैं।’

एक दिन में 32 हजार से अधिक मामले
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में पहली बार एक दिन में कोविड-19 के 32,000 से अधिक मामले सामने आने के साथ गुरुवार को संक्रमितों की कुल संख्या 10 लाख से थोड़ी ही कम रही। कोरोनावायरस संक्रमण से 606 और लोगों की मौत के साथ मृतकों का आंकड़ा 24,915 हो गया।
मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार देश में एक दिन में कोरोनावायरस संक्रमण के 32,695 मामलेे सामने आए। इनमें से करीब 80 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और बिहार से आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 7,975, तमिलनाडु में 4,496, कर्नाटक में 3,176, आंध्र प्रदेश में 2,432, उत्तर प्रदेश में 1,659, दिल्ली में 1,647, तेलंगाना में 1,597, पश्चिम बंगाल में 1,589 और बिहार में 1,329 मामले सामने आए। कुल संक्रमित मामलों में विदेशी भी शामिल हैं।
इस संक्रामक रोग से 6,12,814 लोग स्वस्थ हो चुके हैं जबकि संक्रमित 3,31,146 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यह देश के कुल कोविड-19 मरीजों के एक तिहाई से थोड़ा ज्यादा है। मंत्रालय ने कहा कि अभी तक करीब 63.25 प्रतिशत मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। मंत्रालय ने कहा कि अब तक ठीक हो चुके मरीजों की संख्या उपचाराधीन मरीजों की संख्या से 2,81,668 ज्यादा है। मंत्रालय ने कहा, ‘देश में इलाज करा रहे कुल मरीजों में से 48.15 प्रतिशत सिर्फ दो राज्य महाराष्ट्र और तमिलनाडु से हैं।’    आईसीएमआर के मुताबिक देश में 15 जुलाई तक 1,27,39,490 नमूनों की जांच की जा चुकी है जिनमें से बुधवार को ही 3,26, 826 नमूनों की जांच की गई।

यूपी में हर रोज 50 हजार जांच होगी
उत्तर प्रदेश में अब हर रोज कोरोना की 50,000 जांच की जाएगीं। प्रदेश में बुधवार को देश भर में सबसे ज्यादा 48,066 कोविड नमूने की जांच की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को एक दिन में 50,000 जांच के इंतजाम करने के लिए निर्देश दिए हैं।
गुरुवार को मुख्यमंत्री ने कोविड-19 व संचारी रोग के नियंत्रण के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम 11 की बैठक करते हुए कहा कि हर जिले में नियुक्त नोडल अधिकारी प्रत्येक दिन महामारी की समीक्षा करें। उन्होंने विशेष स्वच्छता एवं सैनिटाइजेशन अभियान के दौरान छिड़काव व फॉगिंग अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश भी दिए हैं। बीएस

First Published - July 16, 2020 | 11:30 PM IST

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