नवरात्रि का पहला दिन जेट एयरवेज के बचे-खुचे 4,000 कर्मचारियों के लिए खुशी का संदेश लेकर आया। बंद हो चुकी इस विमानन कंपनी के कर्जदाताओं की समिति द्वारा कालरॉक-मारुति लाल जालान समूह द्वारा पेश समाधान योजना पर मुहर लगाए जाने के बाद कर्मचारियों में खुशी की लहर दौडऩा स्वाभाविक ही है।
इस पर अपनी प्रतिक्रिया में जेट एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमित केलकर ने कहा, ‘जेट एयरवेज का परिचालन बंद होने के बाद पिछले 18 महीनों से इसके कर्मचारी मुश्किल दौर और वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। अब आखिरकार उम्मीद की किरण जगी है। हमें आशा है कि सरकार के प्रयासों से जेट एयरवेज दोबारा शुरू करने की योजना में तेजी लाई जाएगी।’
पिछले वर्ष जून में जब जेट एयरवेज दिवालिया हुई थी तो उस वक्त इसके कर्मचारियों की तादाद 8,000 थी, जो अब कम होकर करीब 4,000 रह गई है। कंपनी के करीब 175 कर्मचारियों की एक टीम पिछले वर्ष से काम कर रही है।
इस टीम में चार वरिष्ठ कार्याधिकारी- मुख्य रणनीतिक अधिकारी राजेश प्रसाद, विधि प्रमुख गौतम आचार्य, उपाध्यक्ष (नियोजन) एंटनी डीसा और महाप्रबंधक (एमआईएस) फरजाद पटरावाला- शामिल हैं। ये अधिकारी जेट की वापसी के लिए समाधान पेशेवरों के साथ लगातार काम करते रहे हैं।
कर्मचारी सहित जेट से जुड़े सभी पक्ष स्वाभाविक तौर पर शनिवार को हुई प्रगति से बहुत खुश हैं। जेट के चालक दल संघ का प्रतिनिधित्व करने वाली निधि चाफेलकर ने कहा, ‘हमने विमानन कंपनी को संकट से निकालने और कर्मचारियों के बकाया के लिए कड़ी मेहनत की है। अब हमें इस बात से बहुत खुशी हो रही है कि जेट एयरवेज दोबारा उड़ान भर पाएगी।’
इसमें कोई शक नहीं कि जेट एयरवेज के कर्मचारी उत्साह से लबरेज हैं, लेकिन कुछ लोगों के मन में भय बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि कर्जदाताओं ने समाधान प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है, लेकिन इस पर अब भी कई मंजूरी और सरकार के समर्थन की दरकार होगी।
इस पूरी प्रगति पर विमानन क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘फिलहाल हम यह कह सकते हैं कि जेट एयरवेज सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) से बाहर आ गया है, लेकिन अस्पताल से छुट्टी नहीं मिली है। कितने कर्मचारियों की भर्ती होती है और किसकी भर्ती होती है ये बातें नए मालिक और उनकी कारोबारी योजना पर निर्भर करेंगी।’