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फॉक्सवैगन के साथ आएगी पूरी बारात

Last Updated- December 07, 2022 | 12:42 AM IST

भारत के कार बाजार में बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए पूरे तामझाम के साथ यहां उतरने को तैयार जर्मनी की वाहन कंपनी फॉक्सवैगन अपने साथ कई दूसरी कंपनियों को भी न्योता दे रही है।


कंपनी अपने कारोबार में इजाफे के लिए वाहन पुर्जे बनाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी भारत आने के लिए तैयार कर रही है। पुणे के नजदीक चाकन में फॉक्सवैगन के इस संयंत्र को देखकर वाहन पुर्जे बनाने वाली 10 से भी ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें से ज्यादातर कंपनियां दुनिया भर में फॉक्सवैगन की कारों के लिए पुर्जे मुहैया कराती हैं।

फॉक्सवैगन अगर इन कंपनियों को भारत में संयंत्र लगाने के लिए तैयार कर लेती है, तो ये सभी संयंत्र चाकन में कंपनी की जमीन पर ही लगाए जाएंगे। फॉक्सवैगन के पास वहां तकरीबन 240 हेक्टेयर जमीन है। इससे कंपनी को पुर्जे मंगाने में समय बर्बाद होने की चिंता से मुक्ति मिल जाएगी और उनकी ढुलाई में लगने वाला वक्त भी बच जाएगा।

फॉक्सवैगन के संयंत्र के लिए ली गई जमीन का अभी महज 140 हेक्टेयर हिस्सा ही इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी बाकी जमीन पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को ही देने की अपनी मंशा भी जाहिर कर चुकी है।

फॉक्सवैगन इंडिया के विनिर्माण इंजीनिरयिंग निदेशक थॉमस डैलम ने कहा, ‘हम पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को चुन रहे हैं और यह काम आखिरी दौर में है। ये कंपनियां ही हमारे संयंत्र में बनने वाली कारों के लिए पुर्जे मुहैया कराएंगी। हमने विभिन्न कंपनियों को अब तक 10 टेंडर जारी किए हैं और उनका बहुत अच्छा जवाब हमें मिला है। हम अगले कुछ हफ्तों में योजना को अमली जामा पहना देंगे।’

कंपनी पहले अपना कार निर्माण संयंत्र 2010 के शुरुआती महीनों में चालू करने की योजना पर चल रही थी। लेकिन बाजार के लालच में उसने इसे 2009 की पहली छमाही में ही शुरू करने का फैसला किया है। इसी वजह से उसे पुर्जे बनाने वाली कंपनियों से समझौते करने का काम भी तेज करना पड़ा। डैलम कहते हैं, ‘भारतीय बाजार में कारों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि हमने संयंत्र के निर्माण में लगने वाला वक्त काफी कम कर दिया है।’

उन्होंने उन कंपनियों का नाम बताने से इनकार कर दिया, जो पुर्जे मुहैया कराएंगी। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि पुर्जे बनाने के संयंत्र लगाने में कंपनियां कितनी रकम का निवेश करेंगी। डैलम ने कहा कि पुर्जे बनाने वाली कंपनी की जितनी क्षमता होगी, उसी के हिसाब से वह परियोजना में 30 करोड़ से लेकर 200 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी।

फॉक्सवैगन के सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडलों में लक्जरी सेडान पसात शामिल है। इसके अलावा जेटा, टूरेज, पोलो और अप जैसी कारें कंपनी अभी बाजार में उतारने वाली है। चाकन संयंत्र में भी कंपनी ये सभी कार बनाएगी। इसके अलावा उसकी सहयोगी कंपनियों स्कोडा और ऑडी की कारें भी चाकन में ही बनाई जाएंगी।
स्कोडा का महाराष्ट्र के ही औरंगाबाद में संयंत्र है, जहां लॉरा, फैबिया और ऑक्टाविया जैसी कारें बनाई जाती हैं। इनके अलावा ऑडी का ए6 और फॉक्सवैगन का पसात मॉडल भी अभी वहीं बनाया जाता है। पिछले साल जून में फॉक्सवैगन ने भारत में पुर्जों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों से पहली बार बात की थी। उसने सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें देश विदेश की 250 से ज्यादा कंपनियों ने हिस्सा लिया था।

फॉक्सवैगन इनमें से ज्यादातर कंपनियों के साथ दीर्घकालिक समझौते करना चाहती है, ताकि पुर्जों की आपूर्ति में आगे जाकर भी कोई रुकावट नहीं आए। इसके लिए वह अंतरराष्ट्रीय के साथ देशी आपूर्तिकर्ताओं पर भी पूरी निगाह रख रही है।

First Published - May 20, 2008 | 2:02 AM IST

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