प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च के विश्लेषकों ने कहा है कि वोडाफोन आइडिया (वी) की अगले तीन से चार वर्षों में 45,000 करोड़ रुपये की नियोजित पूंजीगत खर्च योजना, बाजार हिस्सेदारी हासिल करने या प्रतिस्पर्धा में सेंध लगाने के लिहाज से पर्याप्त नहीं होगी, क्योंकि इसका यह पूंजीगत निवेश प्रतिद्वंद्वियों रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के 1.2 से 1.4 लाख करोड़ रुपये (14-16 अरब डॉलर) के संभावित खर्च की तुलना में बहुत कम है।
विश्लेषकों ने सोमवार को एक नोट में कहा, ‘हमें नहीं लगता कि वी का नेटवर्क संबंधित निवेश कंपनी के लिए अपनी बाजार हिस्सेदारी में सुधार लाने के लिए पर्याप्त है, लेकिन इससे उसे अपने ग्राहक नुकसान को रोकने में मदद मिलेगी और हमें उम्मीद है कि वी की ग्राहक बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026-28 में लगभग 16 प्रतिशत पर स्थिर हो जाएगी।’
पिछले कुछ वर्षों में भी जियो और एयरटेल ने पूंजीगत खर्च के मामले में वी को पीछे छोड़ दिया है। प्रमुख दो कंपनियों ने वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के दौरान 1.3 से 1.7 लाख करोड़ रुपये (15-20 अरब डॉलर) का नेटवर्क निवेश किया है, जबकि इसी समय में वी का पूंजीगत खर्च 22,500 करोड़ रुपये था।
वी को अपनी स्पेक्ट्रम भुगतान संबंधित जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए तीन साल में अपने परिचालन नकदी प्रवाह को तीन गुना बढ़ाने की जरूरत होगी, जो वित्त वर्ष 2027 में 7,000 करोड़ रुपये से शुरू होकर वित्त वर्ष 2028 में 15,300 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2029 में 27,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएंगी। यह तब है जब सरकार ने अपने बकाया समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये के भुगतान की शर्तों पर 10 साल की राहत दी है।
एचएसबीसी ने रिपोर्ट में कहा, ‘इसके अलावा, वोडाफोन आइडिया वर्ष 2030 से स्पेक्ट्रम नवीनीकरण भी शुरू करेगी, जिसके लिए अतिरिक्त पूंजी निवेश की जरूरत होगी। इसलिए, हमें लगता है कि कंपनी डेटा को बेहतर बनाने और टैरिफ बढ़ाने के लिए दूसरे उद्योग दिग्गजों के साथ महत्त्वपूर्ण रूप से जुड़ी हुई है।’