प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता भारती एयरटेल और अमेरिका स्थित उद्यम क्लाउड सिक्योरिटी प्रदाता जीस्केलर ने शुक्रवार को एक एआई और साइबर थ्रेट रिसर्च सेंटर-इंडिया पेश किया। यह सेंटर आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी उद्योगों और सरकारी परिसंपत्तियों के लिए संभावित डिजिटल खतरों की पहचान और रोकथाम करेगा।
यह मल्टी-स्टेकहोल्डर डिजिटल पहल दूरसंचार, बैंकिंग और ऊर्जा के साथ-साथ डिजिटल उपयोगकर्ताओं में साइबर खतरों का पता लगाने और उन्हें रोकने पर फोकस करेगा, साथ ही भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में एआई अपनाने की जरूरत पर भी जोर देगा।
रिसर्च सेंटर की पेशकश के अवसर पर भारती एयरटेल की होल्डिंग कंपनी भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मित्तल ने कहा, ‘खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर तब जब एआई का इस्तेमाल अब गलत लोग स्पष्ट रूप से कर रहे हैं। सिर्फ एआई केंद्रित टेक्नॉलजी से ही हम खतरों का मुकाबला कर सकते हैं और अपने नेटवर्क तथा देश में संबंधित उद्यमों को सामने आने वाले जोखिमों से बचा सकते हैं। सरकारी संस्थाओं में खतरे और भी ज्यादा हैं।’
एयरटेल और जीस्केलर द्वारा वित्त पोषित यह सेंटर अधिक उद्यमों, सरकारी एजेंसियों और शिक्षा जगत को शामिल करने के लिए स्वतंत्र रहेगा, क्योंकि यह ऐसे साइबर खतरों की पहचान करने के लिए समाधान बनाता है, जिनमें बैंकिंग सिस्टम को बंद करने या परिवहन को बाधित करने की क्षमता है। यह सेंटर जीस्केलर की टीमों और समाधानों का उपयोग करेगा, जबकि एयरटेल नेटवर्क की निगरानी और नए समाधान विकसित करने के लिए आईओटी और मोबाइल ट्रैफिक में विजिबिलिटी के साथ योगदान देगी, जिससे संदिग्ध गतिविधि की तेजी से पहचान और संबंधित हितधारकों के साथ अधिक प्रभावी समन्वय कायम हो सकेगा।
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साइबर सुरक्षा के लिए एक नए कानूनी ढांचे की जरूरत है क्योंकि एआई साइबर खतरों का स्वरूप बदल देगा और इसका मुकाबला करने के लिए उद्योग को बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
मंत्री ने कहा, ‘सभी दूरसंचार ऑपरेटरों को इस पर ध्यान देना चाहिए, प्रमुख आईटी कंपनियों को भी साइबर खतरों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से नए तरीके पर ध्यान देना चाहिए। हमें साइबर सुरक्षा के लिए एक नया कानूनी ढांचा भी बनाना होगा, जिसमें आज हम जिन सभी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और हमारे पास जो नए अवसर हैं, उन पर ध्यान दिया जाए।’ उन्होंने कहा कि ऐसे और भी सेंटर स्थापित किए जाने चाहिए।
यह रिसर्च सेंटर जीस्केलर के परिचालन को निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र, शैक्षिक और सरकार के बीच सहयोग के लिए एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के तौर पर आगे बढ़ाने का काम करेगा।