अमरीकी सरकार ऑटो उद्योग को राहत पैकेज के लिए मंजूरी दे पाने में नकामयाब रही है, लेकिन इसके चलते भारत की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को कोई खास चिंता नहीं है।
बावजूद इसके डेट्रॉयट की तीन बड़ी ऑटो कंपनियों में से एक क्रिसलर टीसीएस की ग्राहक भी है। टीसीएस के मुख्य कार्याधिकारी एस रामादुरई का कहना है, ‘कंपनी के राजस्व में एक अहम हिस्सा उद्योग विनिर्माण से मिलता है। हालांकि इसे लेकर हम अभी गहरी चिंता में नहीं हैं। यह समय है जब कोई कुछ नहीं बोल रहा। और जो आप सुन रहे हैं, वह सिर्फ अटकलें हैं।’
सीआईआई मानव संसाधन सम्मेलन के दौरान टीसीएस के एस रामादुरई ने यह भी कहा कि आईटी उद्योग का विकास पिछले साल जैसा नहीं है, लेकिन हम लगातार विकास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा खर्च कम करने के एक हिस्से के रूप में हो सकता है कि कंपनी द्वारा अपनी कुछ पूंजीगत व्यय टाल दे।
इस साल जुलाई में हुई कंपनी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के दौरान कंपनी ने इस साल के लिए 4,500 करोड़ रुपये बतौर पूंजीगत व्यय की घोषणा की थी। इसमें से टीसीएस का इरादा 1,467 करोड़ रुपये उपकरणों पर और 3,000 करोड़ रुपये जमीन पर निवेश करने का इरादा था।
मौजूदा वैश्विक मंदी क्या अब तक की सबसे बुरी मंदी है पर रामादुरई का कहना है, ‘हम कुछ ऐसा ही पहले भी देख चुके हैं। 80 के दशक में मंदी एवं डॉट कॉम और इंटरनेट कंपनियों का भट्ठा बैठना, लेकिन इससे पहले हमने कभी एक के बाद एक उद्योग पर असर होता नहीं देखा था।
जहां दुनियाभर में संबंधित सरकार इस मामले में सामने आ रही है और वित्तीय सहायता पैकेजों की घोषणा कर रही है, मुझे लगता है कि यह सिर्फ पैसे की बात नहीं है, बल्कि खरीदारी के लिए रवैया भी है।’
हाल में मुंबई पर हुए आतंकी हमले पर रामादुरई का कहना है कि सरकार को नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी अपनी कुछ जिम्मेवारियों को निजी क्षेत्र को सौंपने पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है, ‘देश की सुरक्षा को बेहतर बनाने में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका है। मुझे ऐसा लगता है कि भविष्य में सुरक्षा प्रणाली में तकनीक अहम किरदार निभा सकती है।’