टाटा संस के निदेशक मंडल की अगले सप्ताह प्रस्तावित बैठक टाटा समूह के भविष्य के लिए महत्त्वपूर्ण होने वाली है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल समाप्त होने में अभी एक साल बाकी है मगर संभावना है कि 24 फरवरी को टाटा संस बोर्ड द्वारा उनके तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल की मंजूरी पर विचार किया जा सकता है।
टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की सिफारिश करते हुए पिछले साल एक प्रस्ताव पारित किया था। उस बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में चंद्रा के कार्यकाल को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था।
एक सूत्र ने कहा कि जब टाटा संस के बोर्ड में चंद्रा के कार्यकाल को बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी तब उन्हें इससे खुद को अलग रखना होगा। साल 2022 में जब चंद्रा के कार्यकाल का नवीनीकरण किया गया था तब टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने टाटा संस की बोर्ड बैठक में ‘विशेष आमंत्रित सदस्य’ के रूप में शिरकत की थी और अगले पांच वर्षों के लिए चंद्रा के नाम की सिफारिश की थी।
टाटा संस ने बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा पूछे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया।
साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के चार महीने बाद चंद्रा ने 21 फरवरी, 2017 को टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की कमान संभाली थी। टाटा संस के बोर्ड द्वारा चंद्रा को तीसरे कार्यकाल की मंजूरी मिलती है तो वह 2032 तक समूह का नेतृत्व कर सकते हैं। टाटा समूह में अधिकारी आम तौर पर 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाते हैं जबकि गैर-कार्यकारी भूमिकाओं में 70 वर्ष तक पद पर रहा जा सकता है। कार्यकारी चेयरमैन के रूप में चंद्रा को एक और कार्यकाल मिलता है तो तीसरे कार्यकाल के अंत में वह 68 वर्ष के होंगे।
एक सूत्र ने कहा कि चंद्रा के नवीनीकरण के समय कार्यकारी भूमिकाओं के लिए आयु में छूट दी जा सकती है। साइरस मिस्त्री को हटाने के बाद रतन टाटा द्वारा कुछ समय के लिए कार्यकारी भूमिका संभालने के समय ऐसा ही किया गया था।
जानकारों का कहना है कि चंद्रा के कार्यकाल का नवीनीकरण टाटा संस की सूचीबद्धता के मुद्दे पर भी स्पष्टता ला सकता है। टाटा ट्रस्ट्स का विचार है कि टाटा संस को सार्वजनिक सूचीबद्धता के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। सितंबर 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में नामित किया गया था।