सरकार ने सोमवार को कहा कि स्विगी और जोमैटो जैसी ऑनलाइन खाद्य ऑपरेटरों (एफबीओ) को पारदर्शिता से ऑर्डर राशि के सभी शुल्कों का ब्योरा देना होगा, जिसमें डिलिवरी शुल्क, पैकेजिंग शुल्क, सर्ज प्राइसिंग, कर आदि शामिल हो। साथ ही स्वीकृति होने पर ग्राहकों को रेस्टोरेंट से अपनी जानकारी साझा करने का विकल्प भी दिया जाए।
ऑपरेटरों से यह भी कहा गया है कि वे अपने उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र में सुधार के लिए 15 दिन के भीतर प्रस्ताव पेश करें। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज खाद्य कारोबार के ऑपरेटरों के साथ हुई बैठक के बाद ये निर्देश दिए गए हैं। बैठक में उन मसलों पर चर्चा की गई, जिससे ग्राहक प्रभावित होते हैं।
ग्राहकों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ऑनलाइन फूड बिजनेस ऑपरेटर अनुचित व्यापार व्यवहार अपना रहे हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बैठक के दौरान नैशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर ग्राहकों द्वारा उठाए गए प्रमुख मसलों पर चर्चा हुई, जिसमें डिलिवरी और पैकिंग शुल्क की राशि की सत्यता, इस तरह के शुल्कों की प्रासंगिकता, प्लेटफॉर्म पर दिखाए गए खाद्य पदार्थों की कीमत और मात्रा और वास्तविक आपूर्ति में अंतर, डिलिवरी के समय में असंगति आदि जैसे मसले शामिल थे।
बयान में यह भी कहा गया है कि देश के रेस्टोरेंटों के शीर्ष संगठन द नैशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन आफ इंडिया (एनआरएआई) ने कहा कि ई-क़ॉमर्स एफबीओ द्वारा ग्राहकों की सूचनाएं रेस्टोरेंट के साथ साझा नहीं की जा रही हैं, जिससे ग्राहकों को बेहतरीन तरीके से और उनकी जरूरतों के मुताबिक सेवा करने की उनकी क्षमता पर असर पड़ता है।
रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने यह भी कहा कि डिलिवरी चार्ज सेवा प्रदाताओं द्वारा तय किया जाता है।
ई-कॉमर्स एफबीओ ने अपनी तरफ से पाया कि खाद्य वस्तुओं की कीमत का फैसला रेस्टोरेंट द्वारा किया जाता है और उनकी अपनी शिकायत निपटान प्रणाली है, जिसमें उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज की गई शिकायतों की संख्या और प्रकृति को देखते हुए सुधार की गुंजाइश है।