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हाइपरस्केल डेटा सेंटर के टैक्स दर्जे पर सरकार से स्पष्टता की मांग, आईटीसी और मूल्यह्रास नियमों में बदलाव की सिफारिश

कर सलाहकार फर्म पीडब्ल्यूसी ने सरकार से यह सिफारिश करते हुए कहा है कि डेटा सेंटरों की परिचालन आवश्यकताएं अलग तरह की होती हैं

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आशीष आर्यन   
Last Updated- December 24, 2025 | 10:29 PM IST

हाइपरस्केल डेटा सेंटर का बुनियादी ढांचा ‘सिविल स्ट्रक्चर’ में आएगा या ‘प्लांट और मशीनरी’ की श्रेणी में, सरकार को इस बारे में ​स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि उन्हें निर्माण संबंधी गतिविधियों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए पात्र होने में मदद मिल सके।

कर सलाहकार फर्म पीडब्ल्यूसी ने सरकार से यह सिफारिश करते हुए कहा है कि डेटा सेंटरों की परिचालन आवश्यकताएं अलग तरह की होती हैं। वे एकीकृत बुनियादी ढांचे के साथ काम करते हैं और इन्हें विशेष उद्देश्य से इस तरह बनाया जाता है कि इन्हें दोबारा किसी और उद्देश्य में काम नहीं लिया जा सकता।

पीडब्ल्यूसी ने कहा, ‘खास तौर पर को-लोकेशन डेटा सेंटर सेवा प्रदाताओं का ही मामला लें तो इसमें एक तर्क अलग से दिया जा सकता है कि इनका निर्माण अपने खुद के लिए नहीं है, जहां आउटपुट स्थान, रैक और संबंधित बुनियादी ढांचे का कर योग्य लीजिंग/किराया है। अगर इसे प्लांट-ऐंड-मशीनरी के साथ देखें तो फिर ऐसे बाहरी लीजिंग आपूर्ति को आईटीसी मिलना चाहिए।’

देश में डेटा सेंटर की वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सरकार को अधिक अनुकूल मूल्यह्रास व्यवस्था शुरू करने पर भी विचार करना चाहिए, क्योंकि इन सुविधाओं का निर्माण डिजिटल बुनियादी ढांचे के प्रदर्शन और सुरक्षा को अनुकूलित करने के लिए किया जाता है।

कर सलाहकार फर्म ने अपनी सिफारिशों में यह भी कहा कि क्लाउड सेवाओं के वैश्विक प्रकृति को देखते हुए सरकार को इन डेटा सेंटरों के बारे में भी स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए। यह पता चलना चाहिए कि क्या वे मूल कंपनी को रॉयल्टी की श्रेणी में आते हैं या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के रूप में वर्गीकृत किए जाएंगे।

First Published : December 24, 2025 | 10:22 PM IST