facebookmetapixel
SME शेयर मामले में 26 लोगों पर सेबी की पाबंदी, ₹1.85 करोड़ का जुर्माना लगायाRupee vs Dollar: कंपनियों की डॉलर मांग से रुपये में कमजोरी, 89.97 प्रति डॉलर पर बंदGold-Silver Price: 2026 में सोने की मजबूत शुरुआत, रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी फिसलीतंबाकू कंपनियों पर नए टैक्स की चोट, आईटीसी और गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में भारी गिरावटम्युचुअल फंड AUM ग्रोथ लगातार तीसरे साल भी 20% से ऊपर रहने की संभावना2025 में भारती ग्रुप का MCap सबसे ज्यादा बढ़ा, परिवार की अगुआई वाला देश का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी घराना बनावित्त मंत्रालय का बड़ा कदम: तंबाकू-सिगरेट पर 1 फरवरी से बढ़ेगा शुल्कAuto Sales December: कारों की बिक्री ने भरा फर्राटा, ऑटो कंपनियों ने बेच डालें 4 लाख से ज्यादा वाहनकंपस इंडिया अब ट्रैवल रिटेल में तलाश रही मौके, GCC पर बरकरार रहेगा फोकसलैब में तैयार हीरे की बढ़ रही चमक, टाइटन की एंट्री और बढ़ती फंडिंग से सेक्टर को मिला बड़ा बूस्ट

SC का आदेश: पुणे रेस्तरां फिलहाल ‘बर्गर किंग’ नाम का इस्तेमाल कर सकता है

बंबई हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक रेस्तरां को राहत, अमेरिकी फास्ट-फूड कंपनी ने ट्रेडमार्क उल्लंघन का लगाया था आरोप

Last Updated- March 07, 2025 | 11:38 PM IST
Restaurant Brands Asia

सर्वोच्च न्यायालय ने पुणे के एक रेस्तरां को बंबई उच्च न्यायालय के फैसला सुनाए जाने तक ‘बर्गर किंग’ नाम का इस्तेमाल करने की आज अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने कहा, विवाद से संबंधित आदेश (बंबई उच्च न्यायालय का) स्थगित रहेगा। अलबत्ता बंबई उच्च न्यायालय अपील पर सुनवाई जारी रख सकता है।’

इससे पहले बंबई उच्च न्यायालय ने पुणे की अदालत के उस फैसले को पलट दिया था जिसमें अमेरिका की फास्ट-फूड श्रृंखला बर्गर किंग कॉर्पोरेशन द्वारा उसी नाम से संचालित स्थानीय रेस्तरां के खिलाफ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे को खारिज कर दिया गया था। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब बर्गर किंग कॉर्पोरेशन ने साल 2014 में भारतीय बाजार में प्रवेश किया और पुणे का रेस्तरां साल 2008 से ‘बर्गर किंग’ नाम से चल रहा था। बहुराष्ट्रीय श्रृंखला ने तर्क दिया कि स्थानीय रेस्तरां द्वारा इस नाम का इस्तेमाल उसकी ब्रांड प्रतिष्ठा के लिए नुकसानदेह था और उसने इस नाम का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की।

जुलाई 2024 में पुणे की अदालत ने स्थानीय रेस्तरां के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि वह 1990 के दशक की शुरुआत से ही चल रहा है जबकि बर्गर किंग कॉर्पोरेशन ने भारत में अपना ट्रेडमार्क 2006 में ही पंजीकृत कराया था। पुणे के रेस्तरां को नाम का ‘पहले से और ईमानदार उपयोगकर्ता’ घोषित करते हुए अदालत ने अमेरिकी श्रृंखला के दावों को खारिज कर दिया। श्रृंखला ने इस आदेश को चुनौती देते हुए बंबई उच्च न्यायाल का रुख किया और कहा कि उसने साल 1979 में भारत में ट्रेडमार्क पंजीकृत कराया था, लेकिन साल 2014 तक इसका संचालन शुरू नहीं किया था।

First Published - March 7, 2025 | 11:38 PM IST

संबंधित पोस्ट