एसबी एनर्जी भारत से निकली

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 4:38 AM IST

सॉफ्टबैंक एनर्जी इंडिया (एसबी एनर्जी) ने देश के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 1 लाख करोड़ डॉलर के निवेश और सौर संयंत्रों से मुफ्त बिजली आपूर्ति का वादा करने के महज 5 साल बाद भारत को अलविदा कर दिया। कंपनी आंध्र प्रदेश के कडपा सौर पार्क में 750 मेगावॉट की अपनी सबसे बड़ी परियोजनाओं को पूरा किए बिना भारत से बाहर निकल रही है। राज्य सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए न तो भूमि सौंपी गई और न ही किसी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
यह भारत के अक्षय ऊर्जा बाजार से एक सबसे बड़े निवेशक का बाहर होना भी है। इससे पहले अमेरिका की सौर ऊर्जा कंपनी सनएडिसन ने 2016 में भारतीय बाजार से बाहर हुई थी लेकिन उसे अपनी वित्तीय समस्याओं के कारण ऐसा करना पड़ा था। एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, ‘एसबी एनर्जी के मामले में भारतीय बाजार की कार्यप्रणाली ने एक बड़ी भूमिका निभाई है।’ एसबी एनर्जी ने 3.5 अरब डॉलर के एक सौदे के तहत अपने पूरे पोर्टफोलियो की बिक्री अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) को की है।
सॉफ्टबैंक ग्रुप (एसबीजी) ने 2015 में एसबी एनर्जी इंडिया के लिए 20 अरब डॉलर के शुरुआती निवेश के साथ भारती एंटरप्राइजेज और फॉक्सकॉन के साथ एक संयुक्त उद्यम की स्थापना की थी। कंपनी ने मुख्य तौर पर सौर उपकरणों के लिए विनिर्माण इकाई स्थापित करने की योजना बनाई थी लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। उसके बाद एसबी एनर्जी ने सौर ऊर्जा परियोजना निर्माण की ओर ध्यान केंद्रित किया था।
कंपनी ने बड़ी सौर बिजली परियोजनाओं के लिए आक्रामक बोली लगाई थी। उसने आंध्र प्रदेश में 350 मेगावॉट की सौर परियोजना के लिए 4.63 रुपये प्रति यूनिट पर बोली लगाई जो 2015 में सबसे कम बिजली दर थी। उसने 2018 में 2.7 रुपये प्रति यूनिट दर पर आंध्र प्रदेश के कडप्पा सौर पार्क में 750 मेगावॉट क्षमता के सौर संयंत्र के लिए बोली लगाई थी।
सॉफ्टबैंक के सीईओ मासायोशी सोन ने 2018 में अपनी भारत यात्रा के दौरान घोषणा की थी कि एसबी एनर्जी अपनी सौर बिजली इकाइयों से 25 साल बाद मुफ्त बिजली उपलब्ध कराएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से भी मुलाकात की थी और देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 1 लाख करोड़ डॉलर के निवेश के लिए एसबीजी को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया था।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एसबीजी को एकमुश्त 10 से 15 गीगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं सौंपने की योजना बनाई थी लेकिन कुछ घरेलू कंपनियों के विरोध के कारण उसे टाल दी गई। मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने कहा, ‘एसबीजी भारतीय सौर ऊर्जा बाजार में काफी बड़ा निवेश करने जा रही थी लेकिन वह नहीं हो सका। भारत जैसे देश में बड़े पैमाने पर परियोजना आवंटित करना कठिन है।’

First Published : May 19, 2021 | 11:17 PM IST