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फर्मों में वेतन कटौती होगी, नई नियुक्तियों पर रोक रहेगी

Last Updated- December 15, 2022 | 3:47 AM IST

बीएस बातचीत

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की प्रंबध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी आशु सुयश का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में मामूली सुधार के बावजूद महामारी से प्रभावितों की संख्या लगातार बढ़ रही है और आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश जारी रहेगा। विशाल छाबडिय़ा के साथ बातचीत में वह कहती हैं कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में मामूली सुधार से पहले दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर गिरावट देखी जाएगी। बातचीत के मुख्य अंश…

भारत के कारोबारी क्षेत्र पर महामारी तथा लॉकडाउन का क्या प्रभाव पड़ा?
देश के 30 क्षेत्रों की शीर्ष 800 कंपनियों (राजस्व के हिसाब से) पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2020-21 में उनके राजस्व में 15-17 फीसदी तथा एबिटा में 25-30 फीसदी की गिरावट आएगी, जो एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले सबसे बड़ी गिरावट वित्त वर्ष 2016 में आई थी जब इनमें 1-2 फीसदी की कमी आई थी। हालांकि लॉकडाउन तथा धीमी रिकवरी का असर अगले वित्त वर्ष पर भी पड़ेगा। विमानन कंपनियां, होटल तथा वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र की कई कंपनियों पर वित्त वर्ष 2021 में गंभीर असर पड़ेगा। शहरी उपभोग की भी कंपनियों पर गंभीर मार पड़ेगी। हमने पाया कि 55 क्षेत्रों की 40,000 कंपनियों का मजदूरी बिल 12 लाख करोड़ रुपये के करीब होगा। हमारा मानना है कि इनमें से 68 फीसदी कंपनियों में वेतन कटौती, नई नियुक्तियों पर रोक तथा नौकरी से निकाले जाने जैसी स्थितियां बनने की काफी ज्यादा संभावना है।
विमानन, हॉस्पिटैलिटी, मल्टीप्लैक्स, पर्यटन, खुदरा और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर गंभीर प्रभाव पडऩे के अनुमान हैं। सरकार तथा बैंकिंग क्षेत्र से इन्हें किस तरह की सहायता मिलनी चाहिए तथा इसके अलावा क्या हो सकता है?
क्रिसिल ने 100 से अधिक क्षेत्रों तथा उप-क्षेत्रों का अध्ययन किया जिसमें दशक की औसत वृद्धि दर के मुकाबले वर्तमान वृद्धि दर में विचलन तथा जोखिम का आकलन किया गया। यह दर्शाता है कि कई क्षेत्रों में दशक के औसत राजस्व के मुकाबले उनका राजस्व कम हुआ है। विमानन, होटल, रियल एस्टेट एवं मीडिया मल्टीप्लेक्स उच्च जोखिम वाले क्षेत्र हैं। वाणिज्यिक वाहनों, कार एवं ऑटो क्षेत्र की कंपनियों के राजस्व में भारी गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन उनके अपेक्षाकृत बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल जोखिम को कम करते हैं। यहां अधिकांश हितधारक मध्यम अवधि में कुछ सरकारी सहायता की उम्मीद कर रहे हैं। परिवहन क्षेत्र में एक बार फिर ऋण पुनर्गठन की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि मोहलत की समाप्ति के बाद उनके कम उपयोग को डिफॉल्ट नहीं माना जा सकता।
रेटिंग के स्तर पर क्या माहौल है? कितनी कंपनियां जोखिम स्तर में चली गई हैं?
 
वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में हमारा क्रेडिट अनुपात 0.77 था। वित्त वर्ष 2021 की जून तिमाही में क्रेडिट अनुपात में गिरावट के साथ महामारी का अधिक प्रभाव दिखाई देता है। हालांकि नीति निर्माताओं द्वारा की गई समयबद्ध पहल, जैसे ऋण स्थगन एवं डिफॉल्ट करने की स्थिति में परिवर्तन आदि ने मदद की। विमानन, रत्न एवं आभूषण, ऑटो डीलर तथा रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में कंपनियां क्रेडिट दबाव का सामना कर सकती हैं। दवा, उर्वरक, तेल रिफाइनरियां, ऊर्जा एवं गैस वितरण जैसे क्षेत्रों की लगातार उपयोगिता के चलते इनसे जुड़ी कंपनियां लचीली बनी रहेंगी। यहां तीन चीजें अहम हैं, मांग की वापसी, कार्यशील पूंजी चक्र का नियमितीकरण और नकदी प्रवाह एवं तरलता में लगातार सुधार।

 

First Published - August 4, 2020 | 12:33 AM IST

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