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मुंबई में पानी का संकट गहराया, BMC के फैसले से थम सकते हैं हजारों करोड़ के निर्माण प्रोजेक्ट!

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मुंबई में जल संकट के चलते BMC ने निर्माण स्थलों की पानी आपूर्ति रोकी, जिससे रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत व समयसीमा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

Last Updated- June 18, 2026 | 9:59 AM IST
Water crisis
Representative image

मुंबई के जलाशयों में गिरते जल स्तर और मॉनसून में देरी के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा निर्माण कार्यों के लिए जल आपूर्ति पर रोक लगा दी गई है। इससे निर्माण लागत और परियोजना पूरी होने की समयसीमा के बारे में चिंता बढ़ गई है। उद्योग के हितधारकों ने आगाह किया है कि अगर यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा तो रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बाधित हो सकती हैं।

बीएमसी ने 17 जून से प्रभावी तौर पर शहर के भीतर सभी निर्माण स्थलों के लिए पानी के कनेक्शन निलंबित कर दिए हैं और नए कनेक्शन पर अगले नोटिस तक रोक लगा दी है। उसने औद्योगिक, वाणिज्यिक और खेल परिसरों के लिए जल आपूर्ति में 20 फीसदी कटौती की है जबकि 15 मई से ही पूरे शहर में 10 फीसदी की कटौती लागू है। हीरानंदानी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. निरंजन हीरानंदानी के अनुसार, इसका तात्कालिक प्रभाव परियोजना स्थल पर व्यवधान के रूप में दिखेगा। ऐसा खास तौर पर उन गतिविधियों के लिए दिखेगा जिनमें नियमित जल आपूर्ति की जरूरत होती है, जैसे क्योरिंग, कंक्रीटिंग, बुनियादी कामकाज और श्रम शिविर आदि।

हीरानंदानी ने कहा, ‘अगर यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा तो डेवलपरों को निर्माण चक्र में देरी करनी पड़ेगी। इससे लॉजिस्टिक एवं खरीद लागत बढ़ सकती है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि परियोजना पूरी होने की समयसीमा बढ़ जाएगी और देरी आखिरकार मकान खरीदारों और डिलिवरी प्रतिबद्धताओं को प्रभावित करेगी।’

उद्योग के हितधारकों ने कहा कि स्थायी कनेक्शन की उपलब्धता, परियोजना स्थलों पर भंडारण सुविधाओं, उपचारित पानी तक पहुंच और टैंकरों या बोरवेल पर निर्भरता के लिहाज से परियोजनाओं पर प्रभाव अलग-अलग होगा। मगर पूरे शहर स्तर पर देखा जाए तो इस प्रतिबंध से रिहायशी, औद्योगिक और वाणिज्यिक परियोजनाएं स्पष्ट तौर पर बाधित होंगी।

नाइट फ्रैंक के अंतरराष्ट्रीय पार्टनर, वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक और प्रमुख (परियोजना प्रबंधन सेवा- भारत एवं एशिया प्रशांत) देवेन मोजा ने कहा कि रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा दोनों परियोजनाओं के लिए कंक्रीटिंग, क्योरिंग, प्लास्टरिंग और फिनिशिंग कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, ‘डेवलपरों और ठेकेदारों को उपचारित पानी जैसे वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने या निजी टैंकरों के जरिये पानी खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मगर इन सभी विकल्पों से लागत बढ़ जाएगी।’

मोजा ने कहा कि अगर परिस्थितियां डेवलपरों के नियंत्रण से बाहर हुईं तो वे रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा) के तहत परियोजनाओं के लिए राहत की मांग कर सकते हैं।

एनारॉक ग्रुप के कार्यकारी निदेशक और प्रमुख (अनुसंधान एवं परामर्श) डॉ. प्रशांत ठाकुर के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में 2026 में लगभग 2,07,300 मकान तैयार करने की योजना है जो एक दशक में सर्वाधिक संभावित डिलिवरी है।

इसमें मुंबई शहर की हिस्सेदारी 1,43,000 मकानों की यानी 69 फीसदी है। एनारॉक का मानना है कि एमएमआर में फिलहाल करीब 6,86,000 मकान निर्माणाधीन हैं जिसमें मुंबई की हिस्सेदारी 5,15,000 से अधिक मकानों की है।

मुंबई केंद्रित रियल एस्टेट फर्मों के शेयरों में बुधवार को 0.35 से 2.54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। कलपतरु का शेयर सबसे अधिक यानी 2.54 फीसदी गिरा जबकि गोदरेज प्रॉपर्टीज के शेयर में 0.35 फीसदी की गिरावट आई। भारत के दूसरे सबसे बड़े सूचीबद्ध डेवलपर लोढ़ा डेवलपर्स के शेयर में 2.45 फीसदी की गिरावट आई। ओबेरॉय रियल्टी का शेयर 0.59 फीसदी लुढ़क गया।

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First Published - June 18, 2026 | 9:59 AM IST

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