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पीएसपी, एडीआईए, एनआईआईएफ ने सौदे का उल्लंघन किया: जीवीके

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Last Updated- December 15, 2022 | 2:46 AM IST

कनाडा की पीएसपी, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (एडीआईए) और एनआईआईएफ के साथ समझौते में कई शर्तों पर अमल नहीं किया गया था और इस वजह से जीवीके समूह के साथ हवाई अड्डा बिक्री सौदा टूट गया।
17 अगस्त को जीवीके ने कहा था कि उसने सिर्फ इस आधार पर तीन निवेशकों को ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ जारी किया था कि वे ताजा घटनाक्रम की वजह से सौदे से हटने के अपने निर्णय से सरकार को अवगत कराएंगे। जीवीके समूह ने आज कहा, ‘हालांकि, ऐसा लगता है कि आपके ग्राहकों ने संबंधित पत्र में अनधिकृत खुलासे सुझाव पेश किए हैं। आपका 27 अगस्त 2020 का पत्र एक कदम आगे है और इससे हमारे ऋणदाताओं के लिए भ्रामक बयान सामने आए हैं। आपके ग्राहक इससे अच्छी तरह से अवगत हैं कि उनके कार्य न सिर्फ जीवीकेएडीएल और अन्य समूह कंपनियों में हमारे ऋणदाताओं द्वारा शुरू की गई प्रक्रियाओं और मायल में ऋणदाताओं के साथ समाधान को नुकसान पहुंचा सकते हैं बल्कि इनका हमारे लिए गंभीर वित्तीय निहितार्थ हो सकता है।’
जीवीके की होल्डिंग कंपनी में निवेश के बजाय प्रत्यक्ष रूप से मुंबई हवाई अड्डे में निवेश से जुड़े तीन निवेशकों द्वारा तैयार वैकल्पिक निवेश योजना को जीवीके समूह द्वारा ठुकरा दिया गया था।
तीन निवेशकों को भेजे अपने पत्र में जीवीके समूह ने कहा है कि एस्क्रो खाते में रखा गया पैसा निवेशकों ने मध्यस्थ न्यायाधिकरण की अनुमति के बगैर निकाल लिया गया था।
कोष की इस निकासी की वजह से मध्यस्थ न्यायाधिकरण को उस आदेश को रद्द करने के लिए बाध्य होना पड़ा जिसमें बिडवेस्ट और एसीएसए (एयरपोर्ट कंपनी ऑफ साउथ अफ्रीका) को अपने शेयर बेचने से प्रतिबंधित किया गया था। इसके साथ निवेशकों ने स्वयं बिडवेस्ट और एसीएसए को 23.5 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी समूह को बेचने की अनुमति दी। इससे भी सौदा टूटने की स्थिति पैदा हुई।
निवेशकों को भेजे गए कानूनी नोटिस के जवाब में जीवीके ने कहा है, ‘यह स्पष्ट रूप से इसका प्रमाण था कि तीन निवेशकों ने समझौते का उल्लंघन किया।’ तीन निवेशकों ने पिछले साल अक्टूबर में 7,614 करोड़ रुपये में जीवीके की एयरपोर्ट होल्डिंग कंपनी में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी। इस रकम को लंदन में एस्क्रो खाते में रखा गया था और सौदे को भारतीय प्राधिकरणों से सभी तरह की अनुमति मिलने पर जीवीके को ही इस रकम तक पहुंच का अधिकार था।
लेकिन बिडवेस्ट-जीवीके समझौते को लेकर राइट ऑफ फस्र्ट रिफ्यूजल (आरओएफआर) को लेकर बिडवेस्ट और एसीएसए के बीच कानूनी लड़ाई जारी थी, इसलिए सौदा पूरा नहीं हो सका।
जीवीके ने कहा है कि तीनों निवेशकों को कर्ज के तेज समाधान तलाशने के ऋणदाताओं के प्रयासों में बाधा पैदा नहीं करनी चाहिए।

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First Published - August 31, 2020 | 11:39 PM IST

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