पेट्रोनेट एलएनजी का अमेरिकी कंपनी टेलुरियन इंक के साथ अब कोई समझौता नहीं है। पेट्रोनेट एलएनजी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी एके सिंह ने जानकारी दी।
सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में कहा, ‘मैं समझता हूं कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) का विस्तार नहीं किया गया है। आज हमारे साथ कोई एमओयू नहीं है।’ सिंह पेट्रोनेट एलएनजी और टेलुरियन के बीच समझौते की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। समझौते की शर्तों के तहत दोनों कंपनियों को दिसंबर 2020 तक एक निवेश सौदे को अंतिम रूप देना था। इससे पहले समझौते की अवधि मार्च 2020 में खत्म हो रही थी जिसे बढ़ा दिया गया था।
समझौते को और विस्तार न दिए जाने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, ‘ऐसा पेट्रोनेट एलएनजी की ओर से नहीं बल्कि उनकी (टेलुरियन) तरफ से किया गया है। हम से विस्तार कि लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया।’ इससे पता चलता है कि सौदा समझौते से इनकार कर दिया
गया है। नवंबर 2020 में पेट्रोनेट एलएनजी के अधिकारियों ने खुद को टेलुरियन समझौते से दूर करना शुरू कर दिया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि यह समझौता गैर-बाध्यकारी था। इसके जरिये एक सौदे की संभावनाओं का पता लगाने की कोशिश की गई जो तब तक उभरकर सामने नहीं आया था।
सितंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ह्यूस्टन यात्रा के दौरान पेट्रोनेट एलएनजी और टेलुरियन के बीच इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसे विदेश में शेल गैस हासिल करने के लिए अमेरिका में एक बड़े विदेशी निवेश के तौर पर पेश किया गया था। यह समझौता 40 वर्षों तक टेलुरियन के प्रस्तावित ड्रिफ्टवुड एलएनजी टर्मिनल से सालाना 50 लाख टन एलएनजी खरीदने के लिए था। ड्रिफ्टवुड में 18 फीसदी हिस्सेदारी के लिए पेट्रोनेट द्वारा 2.5 अरब डॉलर के इक्विटी निवेश की भी बात कही गई थी। सिंह ने कहा कि पेट्रोनेट एलएनजी अभी भी कई अन्य गैस आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में है। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने देश के लिए काफी गैस की आवश्यकता है। हम अपने टर्मिनल का विस्तार कर रहे हैं और नए टर्मिनल की क्षमता बढ़ा रहे हैं। भारत ने किसी खास कंपनी, देश या पक्ष का उल्लेख नहीं किया है। जहां कहीं भी हमें सबसे अच्छा सौदा मिलेगा हम उस ओर आगे बढ़ेंगे।’
सालाना 75 लाख टन एलएनजी के आयात के लिए कतर के साथ दीर्घावधि समझौते पर बातचीत के बारे में सिंह ने कहा कि वह सौदा मार्च 2028 में समाप्त होगा। इस सौदे के विस्तार के बारे में निर्णय लेने के लिए पेट्रोनेट एलएनजी के पास 2023 तक का समय है।
पेट्रोनेट एलएनजी ने वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही के लिए 637.92 करोड़ रुपये का समेकित मुनाफा दर्ज किया है। एक साल पहले की समान अवधि में कपनी ने 373.20 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। तिमाही के दौरान कंपनी का कुल समेकित राजस्व घटकर 7,624.47 करोड़ रुपये रहा गया। कंपनी के निदेशक मंडल ने 10 रुपये अंकित मूल्य के प्रत्येक शेयर पर 3.50 रुपये का अंतिम लाभांश देने की सिफारिश की है।