बीएस बातचीत
दुनिया में सबसे अधिक टीके बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका के संभावित टीके एजेडडी1222 पर दांव खेल रही है। पुणे की इस कंपनी के मुख्य कार्य अधिकारी अदर पूनावाला ने कहा है कि वह अपनी जिम्मेदारी पर यह टीका बनाना शुरू कर देंगे। सीरम इस टीके के विनिर्माण के लिए 20 करोड़ डॉलर का निवेश कर रही है। सोहिनी दास के साथ ईमेल साक्षात्कार में पूनावाला ने कहा कि वह 1,000 रुपये से कम कीमत में टीका लाना चाहते हैं और शुरुआत में उसके वितरण का इंतजाम सरकार करेगी। मुख्य अंश:
द लैंसेट में प्रकाशित पहले और दूसरे चरण के नतीजों के मुताबिक ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका का संभावित टीका सुरक्षित है और वायरस का प्रतिरोध करता है। आपको इससे कितनी उम्मीद है?
मुझे भरोसा है कि ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका का संभावित टीका प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाएगा और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लायक होगा। हमें यकीन है कि भारत और ब्रिटेन में परीक्षण सफल हो गए तो कोविशील्ड बाजार में सबसे पहले आने वाले टीकों में शुमार हो जाएगा।
आपने अगस्त से परीक्षण शुरू करने की इच्छा जताई है। क्या नियामक से आपको जरूरी मंजूरी मिल गई हैं?
हम हफ्ते भर में औषध महानियंत्रक से परीक्षण लाइसेंस मांगने जा रहे हैं। सरकार इस मामले में जल्दी कर रही है, इसलिए हमें उम्मीद है कि दो हफ्ते में मंजूरी मिल जाएगी। उसके बाद हम भारत में मानव परीक्षण का तीसरा चरण शुरू कर देंगे।
परीक्षण की योजना, परीक्षण स्थलों की संख्या, नियमों के बारे में आप कुछ बताएंगे?
भारत में तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण अगस्त 2020 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है। हमने करीब 1,000 मरीजों में पहले चरण का परीक्षण देखा है, जबकि दूसरे देशों में बमुश्किल 40 से 60 मरीजों पर ही परीक्षण किया जाता है! हम तीसरे चरण का परीक्षण 5 से 10 हजार मरीजों पर करना चाहते हैं, जिनमें 4-5 हजार मरीज भारत से होंगे। परीक्षण मुंबई और पुणे में कई जगहों पर किए जाएंगे क्योंकि यहां कई इलाकों में संक्रमण के बहुत ज्यादा मामले हैं। इससे हमें टीके का असर आंकने में मदद मिलेगी।
हालिया शोध बताते हैं कि कोविड-19 के एंटीबॉडी जिंदगी भर नहीं रहते। तो क्या बार-बार टीका लेना पड़ेगा?
ज्यादातर टीकों की 2-3 खुराक लेनी पड़ती है। पहली खुराक के बाद की खुराकें प्रतिरोध क्षमता बढ़ाती हैं। मुझे लगता है कि कोविड-19 टीके की भी 2 खुराक लेनी पड़ेंगी।
सीरम हर महीने 30 से 50 लाख खुराक बनाना चाहती है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 35-40 करोड़ सालाना किया जाएगा। आपने इस पर कितना निवेश किया है और अभी कितने निवेश की जरूरत होगी?
हमने ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका का टीका बनाने में अभी करीब 20 करोड़ डॉलर लगाए हैं। जब टीका बनाया जाने लगेगा तो हम बाकी ब्योरा दे पाएंगे।
टीके की कीमत कितनी रखी जाएगी?
अभी कीमत के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी हालांकि शुरुआत में हम इसकी कीमत 1,000 रुपये से कम रखना चाहेंगे। यह टीका सरकार के हवाले किया जाएगा और वही वितरण की व्यवस्था करेगी। हमें आशा है कि शुरुआत में लोगों को टीके के लिए भुगतान नहीं करना होगा।
क्या ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके के लिए अन्य टीकों के उत्पादन में कमी की जाएगी?
महामारी के हालात को देखते हुए हमने अपनी दो इकाइयां कोविड-19 के टीके की लाखों खुराक तैयार करने के लिए अलग कर दी हैं। उस दौरान बाकी उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं होगा।
इस संभावित टीके को लेकर सरकार की ओर से किस तरह की प्रतिक्रिया मिल रही है या कितनी रुचि दिखाई जा रही है?
हम मंजूरी के लिए सरकार और नियामकीय संस्थाओं के संपर्क में हैं। उनकी प्रतिक्रिया बहुत उत्साहवर्धक है।
इसे राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा? क्या आप इसे भारतीयों के लिए अनिवार्य करने की सिफारिश करेंगे?
दुनिया भर में हालात तभी सुधरेंगे, जब यह टीका दूर-दूर तक पहुंचेगा। इसीलिए मुझे लगता है कि शुरुआत में इसे टीकाकरण अभियान में शामिल किया जाएगा।
आप जिन अन्य संभावित टीकों पर काम कर रहे हैं उनकी क्या स्थिति है? आपने आरएनए आधारित टीके के लिए भी गठजोड़ किया है…
हमने अब तक पांच संभावित दावेदारों के साथ हाथ मिलाया है और दो टीके हम खुद भी विकसित कर रहे हैं। हम मानकर चल रहे हैं कि 2021 के अंत तक हमारे टीके भी आ जाएंगे। गठजोड़ के मुताबिक हम नोवावैक्स का टीका बनाएंगे और उसे गावी, टीका गठजोड़ के सदस्य देशों में वितरित करेंगे। कोडाजेनिक्स का टीका भी जल्दी बन सकता है। हम उसे बनाकर दुनिया भर में आपूर्ति करेंगे। हमने आरएनए टीके के लिए भी एक कंपनी से गठजोड़ किया है उसके बारे में भी जल्द अच्छी खबर आ सकती है।
हमें बीसीजी का नए उपयोग में आने वाला टीका कब तक मिलेगा? नियमित बीसीजी टीके के उत्पादन के अलावा आप कोविड के लिए कितने अतिरिक्त टीके बनाएंगे?
हम फिलहाल बीसीजी के संशोधित टीके का तीसरे चरण का परीक्षण कर रहे हैं ताकि उसमें कोरोनावायरस से लडऩे की क्षमता बढ़ सके और देश में कोविड-19 का प्रकोप कम हो सके। यह टीका एकदम सुरक्षित है क्योंकि इसे नवजात शिशुओं को दिया जाता है। हम इसे दशकों से 100 से अधिक देशों में बेच रहे हैं। परीक्षण के बाद हम यह बता सकेंगे कि यह कितना प्रभावी और व्यवहार्य है। उसके बाद ही हम इसका व्यापक उत्पादन शुरू करेंगे। फिलहाल हम देश में 30 से अधिक स्थानों पर आरबीसीजी का तीसरे चरण का परीक्षण कर रहे हैं।