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ग्रीन एनर्जी में बड़ा निवेश करेगी ONGC, 2030 तक 10 गीगावॉट रिन्यूएबल पावर बनाने का लक्ष्य

ONGC घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती है और पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी और पेट्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 12, 2025 | 6:46 PM IST

भारत की सरकारी तेल और गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) अब ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। कंपनी 2030 तक अपने नए ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में निवेश को 100% तक बढ़ाने की योजना बना रही है। इसका मकसद कार्बन उत्सर्जन को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है।

1 लाख करोड़ रुपये का निवेश, 10 गीगावॉट रिन्यूएबल पावर का लक्ष्य

देहरादून मुख्यालय वाली यह कंपनी 2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये (11.5 अरब डॉलर) निवेश कर 10 गीगावॉट क्षमता का रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो तैयार करने की योजना बना रही है। यह निवेश मौजूदा 10 अरब रुपये की तुलना में 100% ज्यादा होगा।

ONGC घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती है और पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी और पेट्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

ONGC का ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ता कदम

ONGC के वित्त निदेशक विवेक चंद्रकांत ने द इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “हम ग्रीन एनर्जी में इसलिए निवेश कर रहे हैं क्योंकि भारत को फॉसिल फ्यूल के अलावा भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत है। हमारे लिए यह नई ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रखने का एक सही अवसर है।”

कंपनी अपने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) का एक बड़ा हिस्सा 25 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, 1 मिलियन टन ग्रीन अमोनिया उत्पादन, जिसमें 1.8 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता शामिल है, और 193 मेगावॉट के सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर खर्च करेगी।

दुनिया में बढ़ रही रिन्यूएबल एनर्जी की मांग

दुनियाभर में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। नई तकनीक, सरकार की नीतियों और पर्यावरण जागरूकता से इस क्षेत्र में लगातार ग्रोथ हो रही है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पवन, सौर और बैटरी स्टोरेज जैसी क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी की लागत लगातार घट रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के ज्यादातर बाजारों में नए कोयला और गैस प्लांट की तुलना में ये टेक्नोलॉजी ज्यादा किफायती हो गई हैं। 2035 तक इनके दाम 22-40% तक कम होने की संभावना है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, 2030 तक बिजली क्षेत्र में रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा 30% से बढ़कर 46% हो सकता है। इस ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान सोलर और विंड एनर्जी का होगा।

First Published : February 12, 2025 | 6:46 PM IST