भारतीय वाहन निर्माता महिंद्रा ऐंड महिंद्रा इलेक्ट्रिक वाहन बनाने की योजना को गति देने के लिए वैश्विक निवेशकों से 25 से 50 करोड़ डॉलर तक जुटाने के लिए बातचीत कर रही है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा, वैश्विक ग्रीन फंडों व प्राइवेट इक्विटी फर्मों के साथ महिंद्रा की बातचीत शुरुआती चरण में है और कंपनी लंबी अवधि का निवेशक चाहती है, जो उसके ईवी कारोबार को खड़ा करने में मदद करे।
बैंकिंग उद्योग के सूत्रों ने कहा, हाल के महीनों में कुछ निवेशकों ने 80 करोड़ डॉलर की फंडिंग में दिलचस्पी दिखाई है और कंपनी के साथ उनकी बातचीत हुई है।
महिंद्रा हालांकि 25-50 करोड़ डॉलर से ज्यादा नहीं जुटाना चाहती है, लेकिन उसने सौदे का आकार बढ़ाने का रास्ता खुला रखा है, जो शर्त व मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।
सूत्रों ने कहा, महिंद्रा बेंचमार्क निवेशक को जोड़ना चाहती है लेकिन वह अभी बड़ी हिस्सेदारी नहीं देना चाहती। ये योजनाएं अभी शुरुआती चरण में हैं और इनमें बदलाव हो सकता है।
महिंद्रा की नई ईवी इकाई का मूल्यांकन जुलाई में 9.1 अरब डॉलर था, जब उसने ब्रिटिश इंटरनैशनल इन्वेस्टमेंट से 25 करोड़ डॉलर जुटाए थे।
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि निवेशक किस मूल्यांकन की पेशकश कर रहे हैं या कंपनी कितना मूल्यांकन चाह रही है।
महिंद्रा ने रॉयटर्स को एक बयान में कहा कि वह ब्रिटिश इंटरनैशनल इन्वेस्टमेंट के साथ इलेक्ट्रिक एसयूवी में 50 करोड़ डॉलर निवेश करने को प्रतिबद्ध है और दोनों कंपनियां मिलकर काम करेंगी।
इससे पहले महिंद्रा ने अगले पांच साल में पांच इलेक्ट्रिक एसयूवी पेश करने की महत्वाकांक्षी योजना सामने रखी थी और उसका लक्ष्य मार्च 2027 तक कुल सालना एसयूवी की बिक्री में ऐसे मॉडलों की 30 फीसदी भागीदारी पाने का है।
कार निर्माता का पहला इलेक्ट्रिक एसयूवी जनवरी में बिक्री के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है।
इस फंड से वाहन निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी टाटा मोटर्स से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी, जो भारत के नए इलेक्ट्रिक कार बाजार में वर्चस्व बनाए हुए है।
पिछले साल टाटा ने अपनी ईवी इकाई के लिए 9.1 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर टीपीजी की राइज क्लाइमेंट फंड से 1 अरब डॉलर जुटाए थे, जो भारत में क्लीन मोबिलिटी के तहत पहला अहम सौदा था।