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निजी इस्तेमाल के बिजली उत्पादकों को लॉकडाउन के झटके

Last Updated- December 15, 2022 | 3:25 AM IST

वैश्विक महामारी कोरोनावारस के प्रसार को रोकने के लिए राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर की गई बंदी की वजह से औद्योगिक व वाणिज्यिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और इससे भारत के निजी इस्तेमाल के बिजली (कैप्टिव पावर) उत्पादकों परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कंपनियों के लिए बिजली एक्सचेंजों में बिक्री का मूल्य व्यावहारिक नहीं मिल रहा है, यहां तक कि उनकी खुद की भी मांग बहुत मामूली है।
स्टील और सीमेंट सहित कुछ बड़े उद्योग अपनी निजी बिजली क्षमता पर भरोसा करते हैं, जिससे कि पूरी प्रक्रिया के लिए अनवरत बिजली आपूर्ति होती रहे। इनमें से कुछ कंपनियां अपने उत्पादन का कुछ हिस्सा बिजली एक्सचेंजों के माध्यम से बेचती हैं।
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स) के अधिकारियों ने जुलाई में पाया था कि मार्च के बाद से निजी बिजली संयंत्रों में उत्पादन की मात्रा में बहुत ज्यादा कमी आई है। साथ ही कारोबार का मूल्य भी गिरा है। एक दिन के आगे के कारोबार में 15 अगस्त के लिए मार्केट क्लीयरिंग प्राइस 1.64 रुपये प्रति यूनिट (किलोवाट/घंटे) रही।
निजी बिजली  की एक्सचेंजों में बिक्री आर्थिक रूप से अव्यावहारिक है, जिसका कारोबा 2 रुपये से 2.25 रुपये प्रति यूनिट के भाव होता है।
श्री सीमेंट ऐसी कंपनियों में से एक है, जिसकी निजी बिजली क्षमता इतनी है कि उसमें से कंपनी एक्सचेंज में बेच सकती है।
श्री सीमेंट के संयुक्त प्रबंध निदेशक प्रशांत बांगर ने कहा, ‘लॉकडाउन के कारण देश में बिजली की मांग प्रभावित हुई है और हमारी कुछ बिजली क्षमता बंद है। लॉकडाउन हटाए जाने के बाद भी बिजली की मांग कम थी और यह पूरी तरह बहाल नहीं हुई। अब बिजली संयंत्र बंद हैं क्योंकि कोई मांग नहीं है, व्यावहारिक होना दूसरा मसला है।’ उन्होंने कहा कि कंपनी की उत्पादन क्षमता 650 मेगावॉट है, जिसमें से 300 मेगावॉट मर्चेंट पॉवर है।
बिजली उत्पादक जेएसडब्ल्यू एनजीई की जुलाई में स्थिति सुधरी है और कंपनी ने कहा है कि उसकी वितरण कंपनियों को उसकी बिक्री 8 प्रतिशत बढ़ी है। वहीं ग्रुप कैप्टिव सेल 25 प्रतिशत कम थी। जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने समूह की कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील के साथ बिजली आपूर्ति समझौता किया है. कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारकी प्रशांत जैन ने कहा, ‘हमारे उत्पादन में कमी लॉकडाउन के कारण समूह के निजी ग्राहकों की वजह से आई है। उन्होंने परिचालन रोक दिया और अब कारोबार सामान्य की ओर बढ़ रहा है।’
इंडियन कैप्टिव पॉवर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईसीपीपीए) के महासचिव राजीव अग्रवाल ने कहा कि देश में कुल निजी बिजली क्षमता 75 गीगावॉट है। उन्होंने कहा कि कोयले के ज्यादा दाम और कम मांग के कारण इनका उत्पादन प्रभावित हुआ है। अग्रवाल के मुताबिक 50 से 55 गीगावॉट कोयला आधारित निजी बिजली उत्पादन होता है, जिसकी क्षमता का महज 40 से 50 प्रतिशत इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा, ‘निजी बिजली संयंत्रों में जो भी उत्पादन होता है, वह बिजली एक्सचेंजों के लिए आर्थिक हिसाब से सही नहीं है। कुल मिलाकर उद्योगों से बिजली की मांग बहुत कम है। यहां तक कि जो संयंत्र एक्सचेंज में बिजली नहीं बेच रहे थे, क्षमता का 40 से 60 प्रतिशत उपयोग कर रहे हैं।’

First Published - August 16, 2020 | 11:45 PM IST

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