केपीएमजी ऑडिट के खिलाफ एनसीएलटी पहुंचे कनोडिय़ा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 9:13 PM IST

श्रेय के संस्थापक हेमंत कनोडिय़ा ने केपीएमजी द्वारा फॉरेंसिक ऑडिट के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) के कोलकाता पीठ का दरवाजा खटखटाया है।
केपीएमजी एश्योरेंस ऐंड कंसल्टिंग सर्विसेज एलएलपी को मार्च-अप्रैल 2021 में ऋणदाताओं द्वारा कॉरपोरेट देनदार (श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई, श्रेय इक्विपमेंट फाइनैंस) में ऑडिटर नियुक्त किया गया था।
19 जनवरी को पेश आवेदन में कनोडिय़ा ने ऐक्सिस बैंक और यूको बैंक (ऋणदाताओं के कंसोर्टियम में प्रमुख बैंक) द्वारा श्रेय में ऑडिटर के तौर पर केपीएमजी की नियुक्ति को रद्द किए जाने की मांग की थी। साथ ही बैंकों को ऑडिटिंग और परामर्श फर्म के जरिये ऑडिट की प्रक्रिया से बैंकों को रोकने की मांग की गई थी।
इस आवेदन में श्रेय में सीआईआरपी (कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया) के संदर्भ में समानांतर ऑडिटिंग की समस्या का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि आईबीसी प्रक्रिया के अनुसार, श्रेय के रिजोल्यूशन पेशेवर (आरपी) ने बीडीओ इंडिया एलएलपी को श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस के ट्रांजेक्शन ऑडिटर के तौर पर नियुक्त किया था। आवेदन में कहा गया है कि लेनदारों की समिति (सीओसी) की बैठक के परिणाम के अनुसार, यह स्पष्ट था कि बीडीओ को कॉरपोरेट देनदार के ऑडिटर के तौर पर नियुक्त किा गया था। इसमें यह भी कहा गया कि बीडीओ और केपीएमजी द्वारा कराए गए ऑडिट के कार्य टकरावपूर्ण थे और इसकी वजह से दो ऑडिटरों के बीच विरोधाभासी और अलग अलग परिणाम निकलने की आशंका थी।
इसके अलावा, कनोडिय़ा द्वारा भेजे गए आवेदन में यह भी कहा गया कि कॉरपोरेट देनदार की अन्य जांच या फॉरेंसिक जांच अनुचित होगी, क्योंकि आवेदक और हटाए गए निदेशक मंडल को किसी तरह का स्पष्टीकरण देने का अवसर नहीं मिलेगा। आवेदन में उठाया गया अन्य मुद्दा यह था कि ऑडिट उसकी समय अवधि को पार कर गया था। आवेदन में कहा गया कि ऑडिट को 24 जून 2021 तक पूरा किया जाना था।

First Published : February 16, 2022 | 11:13 PM IST