जेएसडब्ल्यू की होगी भूषण पावर!

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 7:27 AM IST

भूषण पावर ऐेंड स्टील के बहुलांश ऋणदाताओं ने जेएसडब्ल्यू स्टील के प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया है। इसके साथ ही करीब साढ़े तीन साल से अटके भूषण पावर ऐेंड स्टील की दिवालिया प्रक्रिया के समाधान का रास्ता साफ हो गया है।
ऋणदाताओं ने समाधान योजना के अनुसार भुगतान प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया है, साथ ही इस पर भी सहमति जताई है कि अगर उच्चतम न्यायालय से इस मामले में प्रतिकूल निर्णय आता है तो भुगतान की गई रकम लौटा दी जाएगी। घटनाक्रम के जानकार सूत्रों ने कहा, ’97 फीसदी ऋणदाताओं ने सौदे के प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया है। इस प्रक्रिया को 31 मार्च तक पूरा करने का प्रयास है।’
सौदा करीब 19,350 करोड़ रुपये में होगा और वित्तीय लेनदारों को 47,158 करोड़ रुपये के दावे में से 41.03 फीसदी प्राप्त होगा। कंसोर्टियम में विदेशी बैंकों, परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों और फंडों सहित करीब 25 वित्तीय लेनदार हैं।
ऋणदाताओं को भुगतान करने के साथ ही जेएसडब्ल्यू स्टील कंपनी की संपत्तियों को अपने कब्जे में ले सकती है। भूषण स्टील ऐंड पावर की सालाना क्षमता 27.9 लाख टन उत्पादन की है। जेएसडब्ल्यू स्टील की वर्तमान क्षमता 1.8 करोड़ टन है जबकि 2.06 करोड़ टन स्थापित क्षमता के साथ टाटा स्टील सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनी है। इस अधिग्रहण से जेएसडब्ल्यू देश के पूर्वी बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने में सक्षम होगी।
ऋणदाताओं के साथ समझौते के अनुसार समाधान राशि पंजाब नैशनल बैंक की अगुआई में संयुक्त खाते (एस्क्रो खाते) में रखी जाएगी। ऋणदाता यह रकम ले सकते हैं लेकिन शीर्ष अदालत से प्रतिकूल फैसला आने के बाद उन्हें यह रकम लौटानी होगी।
कानूनी मुकदमों की वजह से भूषण पावर ऐंड स्टील के समाधान प्रक्रिया में देरी हुई है। यह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तैयार की गई 12 कंपनियों के ऋण समाधान वाली पहली सूची में शामिल थी।
कंपनी के पूर्व प्रवर्तक संजय सिंघल और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर याचिका सर्वोच्च न्यायालय में अभी लंबित है। सिंघल ने जेएसडब्ल्यू के प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका तर्क है कि जेएसडब्ल्यू स्टील भूषण पावर ऐंड स्टील (बीपीएसएल) की संयुक्त उद्यम साझेदार और संबंधित पक्ष रही है, ऐसे में आईबीसी की धारा 29ए के तहत वह समाधान योजना पेश नहीं कर सकती है।
जेएसडब्ल्यू और बीपीएसएल संयुक्त उद्यम रोहाने कोल कंपनी में शेयरधारक हैं। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (एनसीएलएटी) ने कहा था कि कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए यह संयुक्त उद्यम बनाया गया था। इसलिए अपील पंचाट ने याचिका को रद्द कर दिया था। सिंघल ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ भी सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है।
ऐसे में ऋणदाताओं ने भले ही जेएसडब्ल्यू स्टील के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी हो लेकिन बीपीएसएल का अधिग्रहण अभी भी अदालत के फैसले पर टिका है।

First Published : March 5, 2021 | 10:56 PM IST