facebookmetapixel
Advertisement
उदारीकरण के 35 साल: पेंशनर पैराडाइस से आईटी राजधानी बना बेंगलूरु, विकास की कीमत भी चुकाईवोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत, SBI ने कर्ज देने पर जताई सहमति; गारंटी की शर्त मंजूरहवाई अड्डों की आगामी नीलामी में एक ऑपरेटर के लिए सीमा तय करने की तैयारीभारत यात्रा को लेकर जल्दबाजी नहीं, राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा बांग्लादेशभारत में 8 साल में 90 हजार स्कूल घटे, 11 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहरस्कूलों की बदहाली के खिलाफ ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान, जेन अल्फा के प्रदर्शनों ने शिक्षा संकट की ओर खींचा ध्यानबंगाल की खाड़ी में माल वाहक जहाज डूबा; तटरक्षक बल ने 2 नाविक बचाए, 22 अभी लापताइसरो की रणनीति में बड़ा बदलाव, लॉन्च वाहन और सैटेलाइट निर्माण निजी क्षेत्र को सौंपेगाबाजार हलचल: सेबी संबंधित पक्षकार लेनदेन के नियम आसान करेगा, पीएमएस सह-निवेश में तेजीअमेरिका-भारत के शेयर महंगे, यूरोप में ज्यादा आकर्षक FCF यील्ड: गोल्डमैन सैक्स

यूआईडीएआई भविष्य की प्रौद्योगिकी पर कर रहा काम

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 11:04 PM IST

आधार का प्रबंधन करने वाली एजेंसी – भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन जैसी भविष्य की प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए तैयारी कर रहा है। यूआईडीएआई के मुख्य कार्याधिकारी सौरभ गर्ग ने आज यह जानकारी दी।
इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) और ब्लूमबर्ग द्वारा आयोजित इनफिनिटी फोरम में गर्ग ने पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा के साथ बातचीत में कहा ‘हम जरूरत वाली क्वांटम रेजिस्टेंट क्रिप्टोग्राफी के मसले के उदाहरण पर विचार कर रहे हैं कि हम प्रमाणीकरण के लिए स्मार्टफोन की क्षमताओं का उपयोग कैसे कर सकते हैं और ब्लॉकचैन का भी, कि हम इसे (आधार डेटाबेस को) कैसे विकेंद्रीकृत कर सकते हैं।’
गर्ग ने कहा कि यूआईडीएआई अन्य देशों के साथ साझेदारी पर विचार करेगा और भारत के आधार के उदाहरण से उनकी सीखने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि आगे चलकर हमें 1.3 अरब से अधिक लोगों वाली इस डिजिटल पहचान के प्रोत्साहन के संबंध में अन्य देशों के साथ सहयोग करने में खुशी होगी। अन्य देश हमारे आर्किटेक्चर और हमारी प्रणाली का इस्तेमाल कर सकते हैं। हम राष्ट्रीय पहचान के लिए मानकों के वास्ते एक अंतररष्ट्रीय संस्थान के निर्माण में अंतराष्ट्रीय संगठनों के साथ भी सहयोग करना चाहेंगे।
यूआईडीएआई प्रणाली में प्रतिदिन पांच करोड़ से अधिक प्रमाण कार्य का प्रबंधन किया जाता है। सरकार की विभिन्न सेवाओं तक पहुंच को सक्षम करने के अलावा 99.5 प्रतिशत आबादी के पास अब मूल पहचान के रूप में यह उपलब्ध है।
शर्मा ने कहा कि पेटीएम और पेटीएम पेमेंट्स बैंक आधार प्रमाणीकरण के प्रबल लाभार्थी हैं, जिसने एपीआई का इस्तेमाल करते हुए अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) प्रक्रिया के लिए समय और आवश्यक प्रयास को कम कर दिया है।

Advertisement
First Published - December 3, 2021 | 11:55 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement