facebookmetapixel
Advertisement
ज्यादा खर्च हो गया? घबराने की जरूरत नहीं, इन आसान तरीकों से फिर पटरी पर लाएं अपनी आर्थिक स्थितिदेश में डॉलर की बंपर आवक! RBI की स्वैप स्कीम से आए $7.28 करोड़, जानें बैंकों पर क्या होगा असरनौकरी छोड़ने के बाद भी EPF खाते पर मिलेगा ब्याज? समझें उम्र व रिटायरमेंट से जुड़ा EPFO का पूरा नियमबिना कमाई वाले छात्रों को भी मिलेगा ₹25 लाख का लाइफ कवर, स्टूडेंट्स के लिए लॉन्च हुआ खास टर्म प्लानशेयरधारकों की बल्ले-बल्ले! 1 शेयर पर 1 फ्री बोनस शेयर दे रही यह कंपनी; 24 अगस्त तय हुई रिकॉर्ड डेटअगले हफ्ते 50 से अधिक कंपनियां निवेशकों को बांटेंगी मुनाफा, एक शेयर पर ₹60 तक कमाने का मौकामानसून में बाढ़ और भूस्खलन से मकान को हुआ नुकसान? समझें होम इंश्योरेंस कैसे बचाएगा आपका पैसाक्या UPI पर नहीं लगेगा कोई भी एक्स्ट्रा चार्ज? 2017 के कड़े नियम को ढाल बनाने की तैयारी में जुटा RBIदिल्ली में बदला मौसम, बारिश ने दी गर्मी से राहत; कई राज्यों में भारी बौछार का अलर्टविकसित भारत के लिए युवाओं को कौशल और डिजिटल ट्रेनिंग देने पर जोर

सैटेलाइट ब्रॉडबैंड पर मित्तल के तर्क को चुनौती

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 2:33 AM IST

सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं किए जाने के सुनील भारती मित्तल के बयान पर दूसरी दूरसंचार कंपनियों ने तीखी प्रतिक्रिया की हैं। मित्तल ने कुछ दिन पहले कहा था कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं हो बल्कि उसे तय मूल्य पर आवंटित किया जाए।
अपनी सैटेलाइट कंपनी वन वेब के लिए और लियो उपग्रह छोड़े जाने के मौके पर मित्तल ने कहा था कि लोग यह नहीं समझते कि अपलिंकिंग के लिए उनकी कंपनी को केवल दो ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने होंगे, जो गांवों में लगेंगे। उनके लिए बहुत कम स्पेक्ट्रम की जरूरत होगी, जबकि जमीनी मोबाइल सेवाओं के लिए देश भर में स्पेक्ट्रम की आवश्यकता  होती है।

मगर दूरसंचार क्षेत्र के एक वरिष्ठ व्यक्ति ने कहा, ‘मित्तल ने यह नहीं बताया कि वन वेब ब्रॉडबैंड सेवाएं देने वाली इकलौती कंपनी नहीं होगी। हमें लगता है कि स्टारलिंक, एमेजॉन, टेलीसैट और ओ3बी समेत 4-5 कंपनियां भी इस मैदान में उतरेंगी। उनके पास वनवेब के मुकाबले अधिक उपग्रह होंगे इसलिए उन्हें अधिक स्टेशनों की जरूरत भी पड़ेगी। हमारे हिसाब से कुल 20-25 ग्राउंड स्टेशनों की जरूरत होगी।’

इस उद्योग के दिग्गजों ने कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन के इर्द-गिर्द 50 से 200 किलोमीटर निषेध क्षेत्र घोषित कर रखा है। इस क्षेत्र में दूरसंचार टावर लगाने की इजाजत नहीं है। एक दूरसंचार कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ’20 ग्राउंड स्टेशनों में तो पूरा भारत ही आ जाएगा क्योंकि प्रत्येक स्टेशन के आस-पास 200 किलोमीटर का निषेध क्षेत्र होगा। इस क्षेत्र में दूरसंचार कंपनियां 5जी टावर खड़ा नहीं कर सकती हैं।’ इसका मतलब यह हुआ कि दूरसंचार कंपनियां सैटेलाइट ब्रॉडबैंड कंपनियों के साथ नहीं टिक सकतीं और 28 गीगाहट्र्ज से 29.5 गीगाहट्र्ज के बीच स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल भी नहीं कर सकतीं। यह स्पेक्ट्रम उनके लिए अहम है मगर उपग्रह के लिए सुरक्षित रखा जाता है।

दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि अगर कंपनियां पूरे देश में इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं तो यह उन्हें बहुत महंगा पड़ेगा। सैटेलाइट कंपनियों को भी बाजार में प्रचलित कीमत चुकानी पड़ती है और उन्हें स्पेक्ट्रम सस्ता नहीं मिलता।

दूरसंचार कंपनियों ने कहा कि वन वेब जैसी सैटेलाइट कंपनियां कस्टमर टर्मिनलों को उपग्रह से जोडऩे के लिए केयू बैंड का भी इस्तेमाल करेंगी और इसकी भी नीलामी किसी दूसरे स्पेक्ट्रम की तरह ही होनी चाहिए। इस समय केयू बैंड का इस्तेमाल वीसैट कंपनियां कर रही हैं और लाइसेंस के हिस्से के रूप में उन्हें एक निर्धारित कीमत पर स्पेक्ट्रम मिलता है। मगर इसका इस्तेमाल एटीएम परिचालन तक ही सीमित है और मांग भी अधिक नहीं है। अब अगर इसी बैंड का इस्तेमाल सैटेलाइट कंपनियां ब्रॉडबैंड सेवाएं देने के लिए करती हैं और दूरसंचार कंपनियों से प्रतिस्पद्र्धा करती हैं तो सैटेलाइट कंपनियां निर्धारित मूल्य पर स्पेक्ट्रम की मांग नहीं कर सकती हैं।

Advertisement
First Published - July 20, 2021 | 11:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement