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फेसबुक, व्हाट्सऐप को झटका

Last Updated- December 12, 2022 | 3:22 AM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के उस नोटिस पर रोक लगाने से इनकार किया है जिसके तहत फेसबुक और व्हाट्सऐप को इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप की नई गोपनीयता नीति की जांच के संबंध में कुछ जानकारी देने के लिए कहा गया था।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह के अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि जांच में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की गई है जिसमें सीसीआई के महानिदेशक को नोटिस जारी किया गया था और 6 मई को खंडपीठ द्वारा कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई थी। मामले पर 9 जुलाई को सुनवाई होगी।
पीठ ने 21 जून को पारित और बुधवार को उपलब्ध अपने आदेश में कहा है, ‘हमने यह भी पाया कि वास्तव में पहले के आवेदन और वर्तमान आवेदन में किए गए आग्रह के बीच पर्याप्त ओवरलैप है। पहले से चल रहे मामले को देखते हुए हम इस स्तर पर 4 जून के नोटिस के कार्यान्वयन पर रोक लगाना उचित नहीं समझते हैं।’ पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि जून में डीजी की ओर से जारी नोटिस 24 मार्च के आदेश के मद्देनजर स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया एक कदम है जो मौजूदा अपीलों में चुनौती का विषय है। लंबित अपीलों  के तहत दायर अपने नए आवेदन में फेसबुक और व्हाट्सऐप ने सीसीआई के उस नोटिस पर रोक लगाने की मांग की है जिसके तहत उनसे पूछताछ के लिए कछ जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
व्हाट्सऐप और फेसबुक को क्रमश: 4 जून और 8 जून को नोटिस जारी किए गए थे। यह मामला फेसबुक और व्हाट्सऐप की उस अपील से संबंधित है जिसमें सीसीआई द्वारा इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप की नई गोपनीयता नीति की जांच संबंधी आदेश के मामले में एकल पीठ के आदेश के तहत उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। उच्च न्यायालय ने 6 मई को उन अपीलों पर नोटिस जारी किया था और केंद्र सरकार से इस पर जवाब देने को कहा था।
उच्च न्यायालय ने अपने 21 जून के आदेश में कहा कि सीसीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अमन लेखी और बलबीर सिंह ने कहा कि हालांकि नोटिस जारी किया जाना मौजूदा जांच को आगे बढ़ाने के लिए कानून के तहत अपेक्षित प्रक्रिया के अनुरूप था। इस जांच पर खंडपीठ द्वारा रोक नहीं लगाई गई है। मांगी गई जानकारी की प्राप्ति के बाद रिपोर्ट तैयार करने में समय लगेगा। उसने कहा कि जब रिपोर्ट तैयार हो जाएगी, तब इसे सीसीआई के पास भेजा जाएगा। रिपोर्ट 7 जुलाई को रोस्टर डिवीजन बेंच के समक्ष अगली सुनवाई तारीख तक तैयार नहीं होगी।
फेसबुक के लिए पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि सवाल औचित्य से जुड़ा था और यह सही नहीं था, क्योंकि देश का सर्वोच्च न्यायालय इस मामले को देख रहा है। दोनों वरिष्ठ वकीलों ने स्वीकार किया था कि कानूनी कार्रवाई को लेकर सूचना की प्राप्ति के 15 दिन के अंदर जानकारी के लिए डीजी की मांग के नजरिये से यह स्पष्ट हुआ है कि डीजी ने खंडपीठ द्वारा जारी लंबित मुद्दों पर निर्णय का इंतजार किए बगैर अपीलकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की बात कही, जो न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है।

First Published - June 23, 2021 | 11:41 PM IST

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