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AI से चुनौती, अंत नहीं: बदलाव के दौर में खुद को ढालेगा आईटी उद्योग

एचसीएलटेक के सीईओ विजयकुमार ने इस दावे को खारिज किया कि 300 अरब डॉलर का भारतीय आईटी उद्योग एआई के कारण खत्म हो सकता है

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 24, 2026 | 10:46 PM IST

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग इस समय आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण बदलाव के कठिन दौर से गुजर रहा है, लेकिन यह कहना पूरी तरह गलत होगा कि इसका अंत करीब है। यह बात एचसीएलटेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) सी. विजयकुमार ने कही।

पिछले हफ्ते भारतीय-अमेरिकी वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने कहा था कि एआई आने वाले दशकों में पारंपरिक नौकरियों को खत्म कर सकती है और भारत का आउटसोर्सिंग उद्योग इससे प्रभावित हो सकता है। उनकी यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां स्वायत्त तरीके से काम करने वाली एआई प्रणालियां ‘एजेंटिक’ वर्कफ्लो को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं। ये अत्याधुनिक एआई मॉडल जटिल कामों को भी स्वयं करने में सक्षम हैं, जिन्हें पहले आईटी और बीपीओ क्षेत्र के पेशेवर संभालते थे।

विजयकुमार ने इस दावे को खारिज किया कि 300 अरब डॉलर का भारतीय आईटी उद्योग एआई के कारण खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह उद्योग खुद को दोबारा नए रूप में ढालेगा। इस बार का बदलाव ऐसा है जिसमें हमारे कई काम अधिक कुशलता और तेजी से किए जा सकते हैं। यह परिवर्तन पहले के बदलावों से अलग है। इसमें लोगों पर असर पड़ेगा, इसलिए यह कठिन होगा। हालांकि आगे का रास्ता उम्मीदों से भरा है।’

उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग ने पहले भी जो बदलाव हुए, उनका सफलतापूर्वक सामना किया है और स्वयं को उसके अनुरूप ढाल लिया। उनके अनुसार, इस बार भी उद्योग को खुद को नया रूप देना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों को लेकर निवेशकों की चिंताएं ‘बढ़ा-चढ़ाकर’ बताई जा रही हैं।

मैकिंजी ऐंड कंपनी के सीनियर पार्टनर नोशिर काका के साथ बातचीत में विजयकुमार ने कहा कि एआई तंत्र में मूल्य का निर्माण सभी के बीच समान रूप से वितरित नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘एआई क्षेत्र में सेमीकंडक्टर और ओईएम कंपनियां, हाइपरस्केलर, सास कंपनियां, फ्रंटियर मॉडल बनाने वाली कंपनियों और सेवा प्रदाताओं समेत कई स्तर हैं।’

First Published : February 24, 2026 | 10:37 PM IST