वैश्विक स्तर पर व्यापक आर्थिक अनिश्चितता और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत का आईटी सेवा उद्योग लगातार राजस्व वृद्धि दर्ज कर रहा है। यही नहीं, धीमी गति से ही सही, लेकिन इस क्षेत्र में भर्तियां भी हो रही हैं। हार्डवेयर और इंजीनियरिंग और रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट (ईआरऐंडडी) सेगमेंट के दम पर आईटी सेवा क्षेत्र का राजस्व 315 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जो सालाना 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
तमाम बाधाओं के बावजूद वित्त वर्ष 26 का राजस्व लक्ष्य पिछले वर्ष से बेहतर है। इस दौरान उद्योग ने 5.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। रणनीतिक समीक्षा से संकेत मिलता है कि निर्यात का अनुमान सालाना 5.6 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 26 में अनुमानित 246 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। वित्त वर्ष 2025 में यह 233 अरब डॉलर के स्तर पर था।
भर्ती के मामले में भी उद्योग में सक्रियता बनी हुई है, लेकिन इसकी गति थोड़ी धीमी है। इस वित्त वर्ष में उद्योग में कुल 135,000 लोगों की नई भर्तियां होंगी, जो 2.3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि है। यह वित्त वर्ष 25 में जोड़े गए 133,000 कर्मचारियों के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी है।
नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार इस बात पर सहमत दिखते हैं कि कि कैंपस से कुल भर्तियां कम हो गई हैं। नैसकॉम ने पहली बार यह भी बताया कि वित्त वर्ष 26 के लिए एआई राजस्व का अनुमान 10 से 12 अरब डॉलर होगा। नांबियार ने कहा, ‘एआई ने कई कंपनियों की आय बढ़ाने में बहुत योगदान दिया है। कई प्रोवाइडर एआई में एक इनऑर्गेनिक रणनीति पर चले गए हैं।
पिछले वर्ष के दौरान शीर्ष 25 प्रोवाइडर में से लगभग 70 प्रतिशत ने एआई-नेटिव फर्मों का अधिग्रहण किया। लगभग 85 प्रतिशत शीर्ष प्रोवाइडर के पास किसी न किसी प्रकार का एजेंटिक प्लेटफॉर्म है।’ आईटी उद्योग में जीसीसी और ईआरऐंडडी विकास के इंजन बने हुए हैं। इनसे आगे भी संभावनाएं बनी हुई हैं, जबकि साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड और जीसीसी-एज-ए-सर्विस तेजी से कई सेगमेंट में जुड़ते जा रहे हैं।